शुक्रवार को ज्यों ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी पार्टियां हो-हल्ला पर उतारू हो गईं, जिसस विधानसभा आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया।
उसके बाद जैसे-तैसे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बजट पेश किया और उसके साथ ही सदन को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
बजट सत्र के पहले दिन यानी गुरुवार को भी विधानमंडल की कार्रवाई बमुश्किल चार मिनट ही चल सकी। पहले से ही तैयार होकर आए विपक्ष ने जमकर हंगामा किया।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के सदस्य सरकार विरोधी नारे लगाते हुए और ऐसे ही नारे लिखे बैनर लिए तथा टोपियां लगाए सभापति गणेश शंकर पांडेय के आसन के सामने आ गए।
सभापति के बार-बार कहने के बावजूद सदस्य जब अपनी जगह पर नहीं गए तो सभापति ने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
सरकार को बर्खास्त कर दो
दोबारा जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो सदस्यों ने फिर नारेबाजी शुरू कर दी। नतीजतन सभापति ने सदन की कार्यसूची के कामकाज निपटाकर कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।
इससे पहले सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने आसन पर खड़े होकर सभापति से कुछ कहना चाहा।
इसी बीच, उनके दल के सदस्यों सहित भाजपा, रालोद, कांग्रेस, शिक्षक दल के सदस्य वेल में आ गए।
बसपा, भाजपा, कांग्रेस और रालोद के सदस्य महिलाओं से दुराचार सहित हत्या, लूट, उत्पीड़न की घटनाओं में बढ़ोतरी पर नाराजगी जता रहे थे। बसपा, कांग्रेस और रालोद के सदस्यों ने प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की भी मांग की।
उठा शिक्षकों की भर्ती का मुद्दा
नारे लगा रहे सदस्यों ने बिजली आपूर्ति, गन्ना किसानों को भुगतान और विकास कार्यों पर भी प्रदेश सरकार को पूरी तरह विफल बताया।
शिक्षक दल के सदस्य शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड को भंग करने की मांग कर रहे थे।
सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। इस दौरान भाजपा के सदस्य वेल में बैठे रहे। 12 बजे सदन बैठा तो फिर विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी।
नतीजतन सभापति ने शोर-शराबे के बीच कार्यसूची के कामकाज निपटाकर कार्यवाही शुक्रवार 11 बजे तक स्थगित कर दी।
पूरी तैयारी से आया था विपक्ष
विधानपरिषद के सत्र के पहले दिन आज जो कुछ भी हुआ उसकी तैयारी विपक्षी दलों ने पहले की कर ली थी, वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने भी आह्रवान किया था कि प्रदेश की वर्तमान समस्याओं पर विधायक सरकार को घेरें।
हालांकि अखिलेश ने भले ही विधायकों से कहा जो कि पूरी तैयारी के साथ आना लेकिन उनकी तैयारी यहां किसी काम नहीं आई। जब-जब सत्र की शुरूआत हुई तब तब विपक्ष ने हंगामा किया।
सत्तापक्ष को अपनी बात रखने तक का मौका नहीं मिला।