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यूपी: पहले भी राख होते रहे हैं अफसरों के काले कारनामों के सुबूत, तय होता है कब और कहां लगेगी आग

Sun, 15 Oct 2017 02:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
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सरकारी दफ्तरों में आग की आड़ में घोटाले और भ्रष्टाचार के सुबूत खाक हो रहे हैं और अग्निशमन महकमे की जांचें ठंडी पड़ी हैं। फायर अफसर ज्यादातर अग्निकांड को शॉर्ट सर्किट बताकर साजिशें दफन कर देते हैं। अब तक कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में आग लगी, लेकिन सिर्फ स्वास्थ्य विभाग स्थित डीजी के ऑफिस में हुए अग्निकांड में ही साजिश का खुलासा हो सका है।
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इस अग्निकांड की जांच एसटीएफ कर रही थी। अगर जांच अग्निशमन महकमे के सुपुर्द होती तो शायद इसमें भी शार्ट सर्किट को ही वजह घोषित कर दिया जाता। सरकारी कार्यालयों में आग हमेशा रिकार्ड रूम, कंप्यूटर कक्ष अथवा ऐसे स्थानों पर लगती है जहां महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज रखे रहते हैं। अग्निकांड के कारणों की फायर महकमा तो पड़ताल करता ही है, संबंधित विभाग के अधिकारी भी अपने स्तर पर जांच कराते हैं।

हालांकि, शायद ही किसी अग्निकांड की जांच में साजिशों का खुलासा हो सका हो। फायर महकमे के अफसर हर अग्निकांड में जांच करके आग लगने के कारणों की रिपोर्ट तैयार करते हैं। साजिश की आशंकाओं पर भी जांच-पड़ताल की जाती है, लेकिन यहां जांच खानापूरी ही साबित होती है।
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किसी भी अग्निकांड की जांच नहीं की गंभीरता से

स्वास्‍थ्य भवन में लगी आग - फोटो : amar ujala
फायर विभाग के अधिकारी आग लगने के पीछे शार्ट सर्किट बताकर मामला रफा-दफा कर देते हैं। राजधानी के फायर विभाग ने आज तक सरकारी कार्यालयों में हुए किसी भी अग्निकांड की जांच गंभीरता से नहीं की।

स्वास्थ्य भवन में डीजी के ऑफिस में लगी आग की जांच अगर एसटीएफ के हाथ में न होती तो शायद ही कभी साजिश का पर्दाफाश हो पाता। फायर विभाग की जांच में अब तक हुए सभी अग्निकांड की साजिशें दफन हो चुकी हैं।

चूंकि, अग्निकांड में संबंधित विभाग के अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक की संलिप्तता होती है इसलिए फायर विभाग की जांच पर कोई सवाल उठाता है न ही विरोध दर्ज कराता है। इसके अलावा महकमे की अपनी जांच में भी लीपापोती कर दी जाती है। सभी जांचें ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।

इन अग्निकांडों की जांचें अटकीं

मंडी परिषद में लगी आग - फोटो : amar ujala
- 27 मार्च 2017 को अलीगंज में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण भवन के सातवें-आठवें और नौवें फ्लोर पर आग से भारी नुकसान।

- 28 मार्च 2017 को हुसैनगंज स्थित बापू भवन सचिवालय के दूसरे तल पर आग से भारी क्षति।

- 14 जून 2017 को गोमतीनगर में वाणिज्य कर विभाग की बिल्डिंग के पांचवें फ्लोर पर आग।

- 16 मई 2016 को विभूतिखंड स्थित मंडी परिषद भवन के पांचवें और छठे तल पर आग से रिकॉर्ड व फाइलें स्वाहा।

- 10 मई 2016 को इंदिराभवन स्थित बाल पुष्टाहार विभाग के कार्यालय में संदिग्ध हालात में लगी आग से दस्तावेज जले।

- 14 जून 2016 को स्वास्थ्य भवन की तीसरी मंजिल पर स्थित लेखा अनुभाग में आग से महत्वपूर्ण फाइलें खाक हो गईं।

- 6 सितंबर 2016 को मिड डे मील प्राधिकरण के दफ्तर में आग से कंप्यूटर समेत महत्वपूर्ण फाइलें फुंकीं।

- 1 दिसंबर 2016 को जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के रिकॉर्ड रूम में आग से हजारों फाइलें स्वाहा।

- 5 अगस्त 2015 को स्वास्थ्य भवन में डीजी हेल्थ के दफ्तर में आग लगी। एसटीएफ की जांच में साजिश का खुलासा।

- 18 अक्तूबर 2015 को शक्तिभवन विस्तार के कॉरपोरेट सेक्शन में आग से महत्वपूर्ण फाइलें जलीं।
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ज्यादातर अग्निकांड छुट्टी के दिन या छुट्टी के बाद

बापू भवन में लगी आग - फोटो : amar ujala
महत्वपूर्ण विभागों में हुए अग्निकांड में से ज्यादातर छुट्टी के दिन अथवा शाम को छुट्टी के बाद हुए। इससे स्पष्ट है कि आग लगने के पीछे कोई न कोई साजिश जरूर है।

स्वास्थ्य भवन में डीजी के ऑफिस और डूडा के रिकॉर्ड रूम में आग शाम को छुट्टी होने के बाद लगी थी जबकि शक्तिभवन के कॉरपोरेट सेक्शन, मिड डे मील प्राधिकरण के ऑफिस, इंदिराभवन स्थित बाल पुष्टाहार विभाग और स्वास्थ्य भवन की तीसरी मंजिल स्थित लेखा अनुभाग में आग रविवार को अवकाश के दिन लगी। मंडी परिषद के भवन में आग आधी रात को लगी थी।
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