सदर कोतवाली में दर्ज कराई गई एफआईआर में वादिनी ने कहा है कि दिसंबर 2017 को इंदिरा नगर गई थी। दिनेश चौधरी, राजेश्वरी सिंह ने धोखे से अनामिका सिंह, मामा उदल राज सिंह उत्ताधिकार सुलह के संबंध में बातचीत करने के लिए बुलाया। मैं पहुंची तो वहां डलमऊ के पूर्व विधायक गजाधर सिंह, आरएसएस नेता भानु प्रताप सिंह, महराजगंज ब्लॉक प्रमुख सत्येंद्र सिंह के साथ जीजा विनोद सिंह, राकेश सिंह, वाणिज्य कर कमिश्नर सत्येंद्र सिंह गौतम, निखिल सिंह पूरब नाईन लाखन सिंह बैठे थे। दिनेश चौधरी व अनामिका सिंह ने दरवाजा बंद कर लिया। नामजद सभी आरोपियों ने रेप किया। गजाधर सिंह व भानु प्रताप मेरी हत्या करने जा रहे थे। ये कहा कि जैसे तेरी मां को हमने ही रेप करके जिंदा जलाया था। तेरे बाप व भाई की हत्या भी हमी लोगों ने की। बाद में लाखन सिंह ने मेरा अश्लील वीडियो भी बनाया। अश्लील वीडियो की धमकी देकर कई अन्य नेता आरबी सिंह, मैंटू सिंह ने भी रेप किया।
यूपी सरकार की पुलिस भले ही कई मामलों में बेहतर कार्य करके वाहवाही लूटती रही हो, लेकिन रायबरेली की पुलिस एफआईआर दर्ज होने के बावजूद यह कहने को तैयार नहीं है कि पीड़ित महिला के मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। यहां की पुलिस और अफसर एफआईआर दर्ज होने तक की पुष्टि करने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। यह हाल तब है, जब दिवाली के एक दिन पहले छह नवंबर को ही केस रजिस्टर कर लिया गया। इसे सत्ता दल का खौफ ही कहा जाएगा। इस बारे में अपर पुलिस अधीक्षक शशिशेखर सिंह से केस दर्ज होने के बारे में जानकारी चाही गई तो उन्होंने मामले से अनभिज्ञता जताई। उधर, सीओ सदर शेषमणि उपाध्याय और कोतवाल अशोक सिंह ने जानकारी देने से साफ इंकार कर दिया और कहा कि इस संबंध में उनको कोई जानकारी नहीं है।
पूर्व विधायक गजाधर सिंह ने मोबाइल पर बताया कि यह मामला एक साल पुराना है। उस समय भी महिला ने कोतवाली में तहरीर दी थी। उस तहरीर में दूसरे लोगों के नाम थे, लेकिन एक साल बाद वहीं महिला उनके खिलाफ तहरीर देकर आरोप लगा रही है। जाहिर है कि किसी साजिश के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी।