उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के कुलपति को अंधेरे में रखकर वित्त अधिकारी ने अलग से बैंक खाता खुलवाया और कॉलेजों से उसमें नौ करोड़ रुपये से अधिक जमा करवा लिए।
इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) कैंपस स्थित बैंक में यह खाता वित्त अधिकारी वीरेंद्र चौबे के नाम से खोला गया।
चौबे ने इसमें अपनी फोटो लगाई और पता भी अपना दिया, जबकि पैन नंबर यूपीटीयू का ही लगाया।
चूंकि अलग से खाता खोलने का आदेश तत्कालीन रजिस्ट्रार यूएस तोमर ने ही दिया था, इसलिए बैंक ने कोई एतराज नहीं जताया।
बैंक की रिपोर्ट में इस हकीकत का खुलासा होने के बाद यूपीटीयू प्रशासन के होश उड़े हुए हैं।
यूपीटीयू के कुलपति डॉ. आर के खांडल को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी कि कॉलेजों से वर्ष 2014-15 की संबद्धता की फीस जमा करवाने के लिए अलग से खाता खोला गया है।
दरअसल तत्कालीन रजिस्ट्रार यूएस तोमर और वित्त अधिकारी वीरेंद्र चौबे के बीच आपसी सहमति से यह खेल हुआ।
तोमर ने कॉलेजों की संबद्धता के आवेदन लेने के लिए यूपीटीयू से अलग वेबसाइट बनाई तथा बाद में वित्त अधिकारी नाम से अलग बैंक खाता खोलकर उसमें नौ करोड़ रुपये से अधिक जमा करवा लिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी संबद्धता प्रकरण की जांच कर रही है।
यूएस तोमर को रजिस्ट्रार पद से हटाकर आर्किटेक्चर कॉलेज से संबद्ध किया गया है लेकिन उन्होंने अब तक जॉइन नहीं किया। यूनिवर्सिटी उन्हें नोटिस भी जारी कर चुकी है।
इधर वित्त अधिकारी वीरेंद्र चौबे भी बीमार होने का हवाला देकर पंद्रह दिनों की छुट्टी पर चले गए हैं। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
बैंक से खाते की पूरी डिटेल निकलवाने के साथ ही कॉलेजों को फर्जी ढंग से खोली गई वेबसाइट व वित्त अधिकारी के नाम से गलत ढंग से खुले इस खाते के बारे में अलर्ट कर दिया गया है।