प्रदेश विधानसभा में करीब 16 साल बाद एक बार फिर बड़ा संघर्ष होते-होते बच गया।
यह वाकया उस दौरान हुआ जब भाजपा के सुरेश राणा मुजफ्फरनगर दंगे पर सदन में अपनी सफाई पेश रहे थे और सत्ता पक्ष के सदस्य टोका-टाकी कर रहे थे।
कैसे हुई ये शर्मसार करने वाली घटना, पढ़िए इस डर्टी पिक्टर के 11 सीन में।
सीन-1
इसी बीच पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी ने बोलना शुरू कर दिया। भाजपा की तरफ से टोका-टाकी हुई तो अंबिका तिलमिला गए। अपमानजनक तरीके से अपशब्द का इस्तेमाल कर दिया।
सीन-2
इसके विरोध में भाजपा सदस्यों के वेल में आकर नारेबाजी करने पर विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी थी। स्थगन के बाद भाजपा के सदस्य वेल में खड़े थे।
सीन-3
इसी दौरान सत्ता पक्ष के पवन पांडेय, कमाल अख्तर, जाहिद बेग समेत अन्य सदस्यों ने भाजपा के उपेंद्र तिवारी, केशव मौर्य, सतीश महाना एवं अन्य सदस्यों के साथ धक्कामुक्की शुरू कर दी।
सीन-4
भाजपा के सदस्य भी उत्तेजित हो गए और वेल में ही दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। मुख्यमंत्री खड़े नजारा देख रहे थे और उनके बगल में अंबिका थे जिनके बड़बोलेपन और भाजपा के सदस्यों के लिए इस्तेमाल किए शब्दों की वजह से यह स्थिति पैदा हुई थी।
सीन-5
भाजपा के एक सदस्य अंबिका की तरफ भी लपके लेकिन उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया। भाजपा और सपा के सदस्यों के बीच गुत्थमगुत्था होती रही और एक-दूसरे को खींचते रहे। कांग्रेस के प्रमोद तिवारी व प्रदीप माथुर ने बीच-बचाव करके सदन के भीतर वह अप्रत्याशित संघर्ष टाल दिया जो 1997 में हुआ था।
पढ़ें: किसकी लड़ाई, क्या हुआ
सीन-6
दरअसल, आजम खां के सदन से जाने के बाद उनकी सीट पर बैठे अंबिका चौधरी ने भाजपा सदस्य उपेंद्र तिवारी के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए अपमानजनक तरीके से बैठने को कहा जिस पर भाजपा सदस्य उत्तेजित हो गए और वेल में आकर नारेबाजी करने लगे।
सीन-7
सदन की कार्यवारी स्थगित किए जाने के बाद उपेंद्र तिवारी व केशव मौर्य अंबिका चौधरी की सीट के करीब तक पहुंच गए जिसके बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने उन्हें धकियाना शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन का स्थगन 10 मिनट के लिए और बढ़ा दिया।
सीन-8
लगभग 1.30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर वरिष्ठ सदस्यों प्रमोद तिवारी, हुकुम सिंह व स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस घटना पर खेद प्रकट करते हुए अनुचित शब्दों को कार्यवाही से निकालने की मांग की।
सीन-9
हुकुम सिंह ने कहा कि अंबिका के रवैये से सदन की गरिमा गिरी है। लीपापोती नहीं होनी चाहिए। समस्या का समाधान होना चाहिए। मंत्री को खेद व्यक्त करना चाहिए क्योंकि उनके कथन से ही उत्तेजना पैदा हुई।
सीन-10
हुकुम ने कहा कि अगर उन्होंने नहीं कहा तो सदन में यही कहें। अंबिका चौधरी ने कहा कि उन्होंने कोई अनुचित शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है फिर भी कोई अनुचित शब्द हो तो उसे कार्यवाही से निकाल दिया जाए।
सीन-11
अगर उनके कथन से कोई आहत हुआ है तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने आपत्तिजनक शब्दों को सदन की कार्यवाही से निकालने का निर्देश दिया। अध्यक्ष ने सदन में महिला सुरक्षाकर्मियों के साथ की गई धक्का-मुक्की का भी संज्ञान लिया है।