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एक्सक्लूसिव: शहरी निकायों को प्रोफेशनल टैक्स, उपयोग कर लगाने का मिले अधिकार

Wed, 23 Jan 2019 03:02 AM IST
शाहरुख खान महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
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पंचम राज्य वित्त आयोग ने नगरीय निकायों को प्रोफेशनल टैक्स व उपयोग कर लगाने का अधिकार देने की सिफारिश की है। आयोग ने आय बढ़ाने के लिए कई अहम सुझाव भी दिए हैं। इसमें नगरीय क्षेत्र में विभिन्न तरह से होने वाली आय का एक हिस्सा निकायों को देने की सिफारिश भी शामिल है।
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आयोग ने कहा है कि नगरीय निकायों के अधिकार क्षेत्र में आने वाली वन संपदा, तालाब, भूमि के उपयोग से मिलने वाले स्टांप शुल्क, मोटर वाहन शुल्क, सबमर्सिबल व हैंडपंप प्रयोग, ट्यूबवेल, निजी विवाह घर व रिसॉर्ट से होने वाली आय का एक हिस्सा नगरीय निकायों को मिले। 

निकाय क्षेत्र में वाहन मालिकों के सड़क अथवा किसी अन्य भू-भाग को स्थायी पार्किंग के रूप में प्रयोग पर उपयुक्त ‘उपयोग कर’ लगाने और व्यावसायिक कार्यों से संबंधित पेशेवर लोगों पर ‘प्रोफेशनल टैक्स’ लगाने पर विचार का सुझाव दिया है। 
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नगरीय सीमा में संचालित नर्सिंग होम, निजी अस्पताल, निजी क्लीनिक व डिस्पेंसरी, पैथलैब, निजी स्कूल-कालेज, कोचिंग संस्थान, मोबाइल सेवा व केबल से उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं को ‘उपयोग कर’ की सीमा में लाया जाए।

ग्रामीण पंचायतों को ग्राम सभा की जमीन पर लगने वाले हाट-पैठ, पशु बाजारों, शासन या पंचायत के अंशदान से बनवाए गए पक्के शेड, पेयजल, शौचालय, खड़ंजा जैसे कामों पर कर लगाने का सुझाव दिया है। 

गांवों में मोबाइल व इंटरनेट सेवा प्रदाता को टावर लगाने से पहले ग्राम सभा से स्वीकृति लेने और इसके लिए ग्राम निधि में वार्षिक शुल्क जमा करने तथा ग्राम पंचायत क्षेत्र में वीडियो जैसे स्थायी प्रचार माध्यमों पर शुल्क लगाने को भी कहा गया है।
 

करारोपण का दें पूरा अधिकार

आयोग ने कहा है कि नगरीय निकायों को विभिन्न ऐच्छिक करों व करेतर राजस्व में वृद्धि के लिए करारोपण का पूर्ण अधिकार होना चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार की पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

स्थानीय स्तर पर विवेकानुसार कर लगाने, कर में वृद्धि करने व राजस्व वृद्धि के लिए नए स्रोतों की पहचान करने का स्वतंत्र अधिकार निकायों को मिलना चाहिए। प्रदेश सरकार को इसके लिए नियमों में जरूरी संशोधन को कहा गया है।

छोटे व्यवसायियों को मिले राहत 
सरकार विभव तथा संपत्ति कर की दरों को समग्र उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर पुनरीक्षित करे। इसी आधार पर क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत अधिनियम में संशोधन कर, कर योग्य आय सीमा की तय राशि 12 हजार वार्षिक को बढ़ाया जाए। इससे बड़ी संख्या में छोटे व्यवसायी कर दायरे से बाहर हो जाएंगे।

ग्रामीण पंचायतों को स्टांप ड्यूटी में मिले हिस्सेदारी

आयोग ने स्टांप ड्यूटी में ग्रामीण पंचायतों को भी भागीदारी देने की सिफारिश की है। आयोग ने कहा है कि स्टांप ड्यूटी मुख्य रूप से भूमि व भवनों के रजिस्ट्री पर लगती है जो कि नगरीय व ग्रामीण निकायों के तहत आते हैं। नगरीय निकायों को यह दो प्रतिशत मिलती है इसलिए ग्रामीण पंचायतों को भी मिलनी चाहिए। यह रकम जिला पंचायतों को उपलब्ध कराई जाए।
 
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ये सुझाव भी दिए

- नगरीय निकाय अपने क्षेत्र में पानी की मीटरिंग व्यवस्था लागू करें। इससे राजस्व बढ़ेगा और जल संसाधन का दुरुपयोग रुकेगा।
- जिला पंचायतें अपने क्षेत्र की बाजारों व स्थलों का विवरण तैयार कर वेबसाइट पर अपलोड करें। वेबसाइट पर वहां लगने वाली दुकानों की आकार के हिसाब से संख्या व लाइसेंस शुल्क का ब्योरा दें जिसकी वसूली जिला पंचायत कराए।
- राज्य सरकार एक मॉडल उपविधि बनाकर जिला पंचायतों को दे। इसमें दर निर्धारण व मानकों का उल्लेख हो। प्रत्येक जिला पंचायत प्रति वर्ष ऐसे प्रतिष्ठानों व संस्थानों की सूची तैयार कर वसूली कराएं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले बाजारों में दुकानों के लाइसेंस की व्यवस्था तय की जाए। इससे व्यवसायियों को अपना कार्य वैधानिक तरीके से करने व लाइसेंस शुल्क जमा करने में दिक्कत न हो।
- विभिन्न योजनाओं के तहत गांवों सीसी रोड, केसी ड्रेन का निर्माण कराया जाता है। बजट पंचायतीराज विभाग को मिलता है, लेकिन निर्माण की जिम्मेदारी ग्रामीण अभियंत्रण की होती है। यह धन ग्राम पंचायतों को ही दिया जाएए और वे ही निर्माण कराएं।
- हैंडपंप रीबोरिंग के लिए सरकार पंचायतों को अलग से बजट दे। यदि पूरा बजट देना संभव न हो तो 50 फीसदी जरूर दे।
 
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