जानकारों का कहना है कि मौत की वजह संदिग्ध होने पर विसरा सुरक्षित कर लिया जाता है। इसमें लीवर, स्प्लीन और किडनी के पार्ट रखे जाते हैं। यदि किसी की एक्सीडेंट में मौत होने का शक हो और शव देखने के बाद संदेह की स्थिति लगे तो विसरा सुरक्षित कर लिया जाता है। जहरीले पदार्थ से मौत के मामले में विसरा जरूर रखा जाता है। डेड बॉडी अगर नीली पड़ी हो, जीभ, आंख, नाखून आदि नीला पड़ गए हों तो भी विसरा रख लिया जाता है।
केजीएमयू के मेडिकल अफसर बीके ओझा का कहना है कि पोस्टमार्टम हाउस में रखे बिसरा मुसीबत बन गए हैं। यहां रखने से कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं। दूसरे जिलों की पुलिस यहीं छोड़ कर चली जाती है। इसे हटवाने की जिम्मेदारी चौक थाने की पुलिस की है। लेकिन पुलिस भी नहीं हटवा रही है। कई बार एसएसपी को पत्र भेजा जा चुका है। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एक बार फिर पत्र भेजा जा रहा है।