डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त संस्थान में जांचें एक नंवबर से महंगी हो जाएंगी। जांचें महंगी करने के पीछे संस्थान का तर्क है कि संस्थान को सरकार की ओर मिलने वाली 30 करोड़ रुपये की राहत राशि अभी तक नहीं मिल पाई है। रकम न मिलने के कारण जांच शुल्क बढ़ाना मजबूरी है।
अभी तक डॉ. राममनोहर लोहिया संयुक्त अस्पताल में एक रुपये का पर्चा बनता है। अधिकतर जांचें निशुल्क हैं। जबकि संस्थान में सौ रुपये का पर्चा बनता है और जांचों का भी पैसा जमा होता है। विलय के बाद संस्थान नियमानुसार लोहिया अस्पताल में भी पैसा लेने का अधिकार रख सकेगा।
विलय के दौरान योजना बनाई गई थी कि सरकार की ओर से 30 करोड़ रुपये मिल जाएं तो लोहिया अस्पताल में पहले की तरह मरीजों को मुफ्त दवाएं मिलती रहेंगी। पैथोलॉजी की जांचें भी मुफ्त होती रहेंगी। अभी तक राहत राशि नहीं मिली है। ऐसे में विलय के बाद संस्थान घाटा उठाने की स्थिति में नहीं है।
सूत्रों की मानें तो संस्थान के अधिकारियों ने दरों का निर्धारण शुरू कर दिया है। केजीएमयू, एसजीपीजीआई की जांच दरों की लिस्ट भी मंगवाई गई है। संस्थान के निदेशक प्रो. दीपक मालवीय कहते हैं कि 30 करोड़ की राहत राशि मिल जाए तो दिक्कत दूर हो जाएगी। रकम न मिलने पर जांच दरें बढ़ाना ही विकल्प होगा। समीक्षा कर अपनी स्थिति की आकलन करेंगे। इसके बाद फीस और जांच संबंधी सुविधाओं पर विचार किया जाएगा।