किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में मुफ्त इलाज कराने वाले रसूखदारों पर लगाम लगायी जाएगी। इनके इलाज केलिए एसजीपीजीआई की तर्ज पर शासन से अलग से रिवाल्विंग फंड मांगा जाएगा।
जिससे ऐसे लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध करायी जा सके। जब तक फंड नहीं होगा रसूखदारों को इलाज के लिए शुल्क देना होगा।
केजीएमयू में सत्ता बदलते ही व्यवस्थाएं भी बदल रही हैं। फ्री इलाज कराने वाले रसूखदारों से परेशान केजीएमयूम प्रशासन अब एसजीपीजीआई की तर्ज पर शासन से अलग फंड की मांग करेगा।
शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, चिकित्सा अधीक्षक और उपचिकित्सा अधीक्षकों के साथ हुई बैठक में ये फैसला किया गया है।
इसके अलावा एजेंसियों के द्वारा तैनात संविदा कर्मचारियों को ईएसआई से इलाज कराने की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। केजीएमयू से दवाएं उन्हें कुछ प्रतिबंध के साथ दी जाएंगी।
इसके अलावा बीपीएल सूची में शामिल न होने वाले मरीजों को किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी अपने स्तर से इलाज मुहैया कराएगी।
इसके लिए दो संकाय सदस्यों, संबंधित विभाग के हेड, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और चिकित्सा अधीक्षक की संस्तुति अनिवार्य होगी। जिससे गरीब मरीजों को किसी भी हाल में बिना इलाज के वापस न लौटना पड़े।