किसानों के प्रतिनिधियों से बात करते अधिकारी।
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गन्ना किसानों के 155 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान पर रार तेज हो गई थी, लेकिन देरशाम प्रशासन की ओर से भरोसा दिए जाने के बाद किसानों ने आंदोलन खत्म कर दिया। एक तरफ जहां मिल प्रबंधन ने किसानों को आश्वस्त किया कि पहली जनवरी को वह दस करोड़ का भुगतान कर रहा है। तीन करोड़ का भुगतान पहले ही कर चुका है। इसके अलावा हर दिन दो करोड़ का भुगतान करेगा। इस तरह 28 फरवरी को पूरा बकाया भुगतान कर देगा।
इस आश्वासन के बाद डीएम व एसपी ने आंदोलन में शामिल संगठन के कुछ प्रतिनिधियों से वार्ता कर पत्रकारों से बातचीत करके कहा कि आंदोलन खत्म हो गया है। लेकिन इसके उलट बजाज चीनी मिल कुंदरूखी के बाहर संगठनों का आंदोलन और तेज रहा। सपा नेता सूरज सिंह भी आंदोलन कर रहे किसानों के बीच पहुंचे थे। फिर शाम को अधिकारी मौके पर पहुंचे और आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया।
प्रशासन की ओर से आंदोलन खत्म किये जाने की घोषणा के बाद भी किसानों का आंदोलन जारी रहने पर प्रशासन पूरी तरह से तैयारी में जुटा रहा। डीएम ने खुद मिल अधिकारियों को हिदायत दी कि किसानों का बकाया भुगतान प्राथमिकता से करें। इस पर मिल के अधिकारी भी तैयार हो गए और बात बन गई। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एक संगठन के पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर मिल प्रबंधन की ओर से दर्ज कराया गया। मामला बिगड़ता देख सीआरओ और एएसपी ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर वार्ता की।
मिल प्रबंधन से भी बात किया और किसानों के बकाए का भुगतान करने पर जोर दिया। इसके बाद मिल प्रबंधन ने एक साथ तो भुगतान करने में असमर्थता जताई, लेकिन दो माह में पूरे भुगतान का भरोसा दिया। सदर तहसील में जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने एसपी संतोष मिश्र, सीडीओ शशांक त्रिपाठी, एसडीएम सदर विनोद कुमार सिंह के साथ पत्रकारों से वार्ता किया।
उन्होंने आंदोलन कर रहे किसानों के साथ हुई वार्ता के बारे में बताया। कहा कि अब किसानों के भुगतान का मुद्दा हल हो गया है और आंदोलन वापस हो गया है। उन्होंने भी माना कि किसानों के बकाया का भुगतान जरूरी है और वह होकर रहेगा। डीएम के सख्त तेवर के बाद मिल प्रबंधन भी तैयार हो गया। किसानों का आंदोलन भी सफल रहा और भुगतान की कार्रवाई शुरू हो गई है। इससे आंदोलन स्थगित हो गया।