माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। जो देखे थे वो सारे ख़्वाब रुख़्सत हो गए हैं,
हमारे सब अदब आदाब रुख़्सत हो गए हैं। ये मशहूर शेर कहने वाले और देश-विदेश में उर्दू शायरी में लखनऊ का नाम रोशन करने वाले मशहूर शायर रईस अंसारी 75 वर्ष की उम्र में बुधवार को निधन हो गया। वे काफी समय से बीमार चल रहे थे। बुधवार शाम ऐशबाग स्थित बड़ी मस्जिद में नमाजे जनाजा के बाद चमन कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे खाक किया गया।
स्व. रईस अंसारी ने भारत के अलावा दुबई, मस्कट, अमेरिका, जद्दा, कतर और शारजाह आदि देशों में मुशायरों में शिरकत की थी। वे अपने जमाने के मशहूर शायर वाली आसी के शागिर्द थे। रईस अंसारी ने लखनऊ के इतिहास पर किताब हमारा लखनऊ लिखी थी। रईस अंसारी के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है। उनके निधन पर सुन्नी यूथ फेडरेशन समेत कई साहित्यिक संस्थाओं के अलावा कई शायरों और कवियों ने दुख जताया।
रईस अंसारी की मशहूर गजल है - बीते हुए लम्हों को सोचा तो बहुत रोया, जब मैं तिरी बस्ती से गुज़रा तो बहुत रोया। पत्थर जिसे कहते थे सब लोग ज़माने में, कल रात न जाने क्यूँ रोया तो बहुत रोया।