रेलवे में नौकरी देने का झांसा देकर बाकायदा नियुक्ति पत्र और फिर प्रशिक्षण देने का गिरोह चला रहे नौ जालसाजों को एसटीएफ ने शुक्रवार को दबोच लिया। गिरोह के सदस्य नौकरी के नाम पर नौजवानों से मोटी रकम वसूलते थे।
विज्ञापन
गिरोह ने अपने शिकार अभ्यर्थियों को फर्जी ट्रेनिंग देने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग सेंटर खोल रखा था। यह सेंटर लखनऊ में तैनात रेलवे के एक अफसर के घर में चल रहा था। एसटीएफ इस रेलवे अफसर की भूमिका की भी जांच कर रही है।
मौके पर विभिन्न राज्यों से आए 13 युवक भी मिले, जिन्हें ट्रेनिंग दी जा रही थी। युवकों के नाम-पते नोट कर उन्हें जाने दिया गया है। गिरोह के सदस्यों से पूछताछ जारी है।
विज्ञापन
एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. त्रिवणी सिंह को इस गिरोह के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने जिम्मेदारी सौंपी थी।
अपर पुलिस अधीक्षक ने अपनी टीम के साथ इस गिरोह के फर्जी ट्रेनिंग सेंटर के बारे में जानकारी हासिल की। पता चला कि लखनऊ के मानकनगर क्षेत्र में रेलवे की स्लीपर ग्राउंड कॉलोनी के मकान नंबर डी-126 में फर्जी सेंटर चल रहा है।
यह मकान लखनऊ में तैनात रेलवे के अफसर अरविंद बहादुर सिंह का है। उन्होंने अपना सरकारी मकान गिरोह के सदस्यों को किराए पर दिया हुआ था। डॉ. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक इस ट्रेनिंग सेंटर में फर्जी तरीके से बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये लेकर ट्रेनिंग करवाई जा रही थी।
जिन्हें पकड़ा गया है उनके पास से बड़ी तादाद में रेलवे के फर्जी कागजात, मोहर व अन्य सामान बरामद हुआ है। यह गिरोह पूरे देश में नौजवानों को रेलवे में नौकरी दिलाने का आश्वासन देकर ठग रहा था।
छापेमारी कर नौ आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
डेमो
फर्जी ट्रेनिंग सेंटर में विभिन्न प्रांतों से युवकों को लाकर फर्जी ट्रेनिंग दी जाती थी। एसटीएफ के सूत्रों के अनुसार बड़े पैमाने पर हो रहे इस फर्जीवाड़े से लाखों-करोड़ों का वारा-न्यारा करने वालों में रेलवे के कुछ अधिकारियों के नाम भी आ सकते हैं।
एएसपी एसटीएफ ने बताया की रेलवे का फर्जी ट्रेनिंग सेंटर चलने की सूचना पिछले तीन महीने से आ रही थी। जालसाजों ने युवकों से साढ़े तीन लाख से चार लाख रुपये नगद लेकर नौकरी दिलाने की बात कही थी। इस बाबत छात्रों को ट्रेनिंग के लिए लखनऊ बुलाया गया था।
एएसपी ने बताया की छापेमारी कर नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों में संचालक दिलीप सिंह, सह संचालक कुणाल श्रीवास्तव, शिक्षक मुकेश कुमार, एजेंट रवीश रावत, एजेंट राजेश शर्मा, एजेंट राजीव, एजेंट जितेंद्र कुमार उर्फ जीतू, एजेंट अशोक कुमार और अमित कुमार शामिल हैं।
इसके अलावा कोलकाता निवासी मुख्य शिक्षक रजनीश सिंह कुछ दिन पहले ही छुट्टी लेकर निकल चुका है। अभी तक की पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह का मास्टर माइंड बिहार के सीवान जिले का है।
एसटीएफ ने इस सेंटर से रेलवे की कई फर्जी मोहरें, छात्रों के आईडी कार्ड, फर्जी नियुक्ति पत्र, रजिस्टर (जिस पर शिकार हुए छात्रों का लेखा-जोखा मिला है) समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।
एसटीएफ अधिकारियों को अंदेशा है कि जिस तरीके से जालसाजों ने सब कुछ व्यवस्थित किया था, उससे लगता है कि रेलवे का कोई अधिकारी भी उनके साथ मिला हुआ है। एसटीएफ अफसरों का कहना है कि इस गिरोह के संपर्क बिहार के सीवान, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तक हैं।
यह देखा जा रहा है कि और किन और राज्यों में गिरोह के सदस्य सक्रिय हैं। कहां-कहां की पुलिस उनकी तलाश कर रही है। जालसाजों ने युवकों को 15-15 के गुट में बांट दिया था। इसके बाद उन्हें अलग-अलग दिन बुलाकर फर्जी ट्रेनिंग दी जाती थी।
गिरोह के सदस्यों ने रेलवे अस्पताल मे की हुयी थी सेटिंग
डेमो
झांसे में आए युवकों को तसल्ली दिलाने के लिए गिरोह के सदस्यों ने रेलवे अस्पताल में सेटिंग की हुई थी। जिन्हें ट्रेनिंग़ कराने लाया जाता था उनका बाकायदा रेलवे अस्पताल में चेकअप कराया जाता था। कई छात्रों का मेडिकल चारबाग स्थित रेलवे अस्पताल में तो कुछ का मेडिकल विभिन्न सरकारी अस्पतालों में करवाया।
फर्जी ट्रेनिंग सेंटर में मिले छात्रों से जब पूछा गया कि उन्होंने किसी से नियुक्ति की बात क्यों नहीं बताई, तो छात्र चंदन रावत निवासी गाजीपुर का कहना था की फर्जी ट्रेनिंग सेंटर के एजेंटों ने मना किया था।
एजेंटों का कहना था की सब सेटिंग से हो रहा है। नियुक्ति पत्र मिलने तक किसी को कुछ मत बताना, नहीं तो दिक्कत हो सकती है। ऐसे में सभी छात्र और उनके परिजनों ने भरोसा करते हुए चुप्पी साध ली।
संचालक दिलीप सिंह ने बताया की फर्जी ट्रेनिंग सेंटर का मुख्य शिक्षक रजनीश सिंह है। वही ट्रेनिंग देता है। उसके साथ दो और शिक्षक भी हैं, जो उसकी अनुपस्थिति में ट्रेनिंग देते थे। रजनीश कुछ दिन पहले ही छुट्टी लेकर कहीं गया है। एसटीएफ अब रजनीश व अन्य की तलाश में जुट गई है।
संचालक दिलीप ने बताया की उन लोगों ने एक फर्जी वेबसाइट भी बनाई थी। जिस पर उन्होंने रेलवे में डी ग्रेड की नौकरी की वेकेंसी निकाली। इसमें गैंगमैन, खलासी समेत विभिन्न पदों पर सीधी नियुक्तियां निकाली गईं। इसके बाद वेबसाइट और एजेंटों के झांसे में आए छात्रों ने आवेदन किया। उन्हें नियुक्ति के लिए ट्रेनिंग पर लखनऊ बुलाया गया। इसके बाद वेबसाइट डिलीट कर दी गई।