आईटीआई के नाम पर उत्तर प्रदेश में तबेले चलाए जा रहे हैं। यह हम नहीं कह रहे, यह खुलासा हुआ खुद अधिकारियों की रिपोर्ट में।
प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशक के निर्देश पर इसी वर्ष महज दो जिलों के आईटीआई की जांच में प्रशिक्षण का ढोंग रचने वाली कई निजी आईटीआई की असलियत सामने आ चुकी है।
जांच में पाया गया है कि इन आईटीआई में कहीं भवन के नाम पर केवल दीवारें हैं, तो कहीं स्टाफ और टूल्स ही नदारद।
कई जगह तो जांच टीम को धमकाया भी गया। जांच टीम के मुताबिक ये आईटीआई प्रशिक्षण संस्थान कम जानवरों का तबेला ज्यादा लग रहे थे।
प्रदेश की निजी आईटीआई में फर्जीवाड़े की तमाम शिकायतों के बीच इस साल मार्च के महीने में प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशक ने प्राविधिक अधिकारी से फतेहपुर और इलाहाबाद के आईटीआई की जांच करवाई थी।
जांच रिपोर्ट में किया खुलासा
प्राविधिक अधिकारी जीबी सिंह ने गत 7 मार्च को अपनी रिपोर्ट दाखिल की थी। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के औचित्य पर सवाल खड़ा किया। फतेहपुर की एक निजी आईटीआई को तो उन्होंने जांच रिपोर्ट में जानवरों का तबेला तक कह दिया।
उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा करने वाली आईटीआई का निरीक्षण डायरेक्टरेट जनरल एम्पलॉयमेंट एंड ट्रेनिंग (डीजीईटी) की संयुक्त टीम से कराने को कहा है। इसी के साथ उनकी मान्यता समाप्त करने की भी सिफारिश की है।
बगैर प्रशिक्षण काट रहे चांदी
जुलाई में हुई आईटीआई की वार्षिक परीक्षा में प्रदेश में करीब 20 हजार फर्जी अभ्यर्थियों के बैठने का मामला सामने आया था। जानकारों के मुताबिक ये फर्जी अभ्यर्थी ऐसे ही निजी आईटीआई से सेटिंग करके परीक्षा में शामिल हो जाते हैं।
इस तरह अभ्यर्थियों को दो साल का प्रशिक्षण नहीं करना पड़ता और संस्थान बिना प्रशिक्षण कराए लाखों कमाते हैं।