मुजफ्फरनगर में तैनात डॉक्टर का तबादला रुकवाने को पीडब्ल्यूडी का जेई सीबीआई अफसर बनकर बृहस्पतिवार को प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के पास पहुंच गया। उसने उन्हें अर्दब में लेने की कोशिश की। वहीं, संदेह होने पर प्रमुख सचिव ने पुलिस बुलाकर उसे पकड़वा दिया।
जब पुलिस ने केस दर्ज करने को तहरीर मांगी तो विभाग के सभी अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए। इसकी जानकारी सीओ हजरतगंज और इंस्पेक्टर ने उच्चाधिकारियों को दी। अधिकारियों के निर्देश पर चौकी प्रभारी की तहरीर पर देर रात जालसाजी का केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
मुजफ्फरनगर में तैनात जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राधेश्याम वर्मा का स्थानांतरण शामली में हो गया है। वहां कार्यभार ग्रहण करने में असमर्थता जताई तो अधिकारियों ने बिजनौर तबादला कर दिया। इसे रुकवाने को डॉक्टर ने कई जगह पैरवी की। पीडब्ल्यूडी के जेई हरिओम चौधरी ने उसका ट्रांसफर रुकवाने का दावा किया। हरिओम के पत्नी और बच्चों का इलाज काफी दिनों से डॉक्टर कर रहा था।
दोनों बृहस्पतिवार सुबह लखनऊ पहुंचे। इसके बाद सीधे जनपथ स्थित प्रमुख सचिव स्वास्थ्य कार्यालय गए। वहां डॉक्टर ने प्रमुख सचिव से मिलने को समय मांगा। दोपहर करीब तीन बजे प्रमुख सचिव ने डॉक्टर को कार्यालय में बुलाया। डॉ. राधेश्याम वर्मा के साथ हरिओम भी प्रमुख सचिव से मिलने गया।
प्रमुख सचिव ने किए सवाल तो फंस गया
फर्जी सीबीआई दरोगा हरिओम चौधरी
- फोटो : amar ujala
डॉ. वर्मा और हरिओम सचिवालय के पंचम तल स्थित प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के कार्यालय पहुंचे। पहले तो डॉक्टर ने अपनी बात रखते हुए तबादला रोकने की सिफारिश की। इस पर प्रमुख सचिव ने साफ इंकार कर दिया।
इसके बाद हरिओम ने खुद को सीबीआई अफसर बताकर परिचय दिया और प्रमुख सचिव पर तबादला रोककर मुजफ्फरनगर में ही बहाली के लिए दबाव बनाया। कुछ देर बातचीत हुई तो प्रमुख सचिव ने सवाल कर दिए। इनका जवाब फर्जी सीबीआई अफसर बना जेई नहीं दे सका।
संदेह बढ़ने पर प्रमुख सचिव ने कई और सवाल कर दिए। इससे हरिओम घबरा गया। यह देख प्रमुख सचिव ने दोनों को पास केसोफे पर बैठने को कहा और पुलिस को सूचना दे दी। इस पर सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा और इंस्पेक्टर हजरतगंज आनंद कुमार शाही सचिवालय पहुंचे और दोनों को लेकर थाने पहुंचे। हरिओम के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है।
जुगाड़ लगाने में जुट गया फर्जी अफसर
प्रमुख सचिव की सूचना पर जैसे ही पुलिस सचिवालय पहुंची, हरिओम के हाथ-पांव फूल गए। उसने तत्काल पुलिस के कुछ उच्चाधिकारियों को भी फोन कर दिए। बताया कि वह प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के कार्यालय में अपने रिश्तेदार का तबादला रुकवाने आया था। प्रमुख सचिव से कहासुनी हो गई तो उसने हजरतगंज कोतवाली में बैठवा दिया। थाने पहुंचकर भी उसने अधिकारियों से बात करने के नाम पर पुलिस को अर्दब में लेने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने मोबाइल छीन लिया।
तहरीर देने के नाम पर हाथ खड़े किए
- फोटो : demo
पुलिस ने दोनों आरोपियों को हजरतगंज कोतवाली पहुंचा दिया। साथ ही प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और विभाग के अन्य अधिकारियों से तहरीर देने को कहा। करीब दो घंटे इंतजार के बाद अधिकारियों ने तहरीर देने से साफ इंकार कर दिया। इससे पुलिस उहापोह में फंस गई। इसकी जानकारी एसएसपी दीपक कुमार सहित कई उच्चाधिकारियों को दी गई।
एसएसपी ने प्रमुख सचिव से बातचीत की। इसके बाद भी तहरीर देने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। अंत में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर हजरतगंज थाने के चौकी प्रभारी की तहरीर पर जालसाजी का केस दर्ज कर हरिओम को गिरफ्तार कर लिया।
खुद को बताता था आईएएस अफसर
हरिओम चौधरी ने पहली मुलाकात में डॉक्टर से भी खुद को आईएएस अफसर बताया था। डॉ. राधेश्याम वर्मा के मुताबिक हरिओम ने उसे बताया था कि उसका चयन आईएएस अधिकारी के रूप में हुआ था। उच्चाधिकारियों से विवाद होने के बाद नौकरी छोड़ दी।
इसके बाद सीबीआई में सेक्शन अधिकारी के रूप में ज्वाइन कर लिया है। जब तबादले की बात सुनी तो उसने आश्वासन दिया कि प्रमुख सचिव से काम करवा देगा। इसके बाद दोनों लखनऊ पहुंचे।