कार्यक्रम में प्रस्तुति देतीं मालिनी अवस्थी।
लखनऊ। लुप्तप्राय संस्कृतियों को सहेजने वाले दो दिवसीय लोक उत्सव ‘देशज’ की शुरुआत शुक्रवार को राम मनोहर लोहिया पार्क में हुई। इसके मंच पर लोक संस्कृति के नजारे दिखे। सोनचिरैया फाउंडेशन के आयोजन की शुरुआत लोकगायिका मालिनी अवस्थी के रामचरित मानस गान से हुई। इसके बाद कोरियोग्राफर मैत्री पहाड़ी के निर्देशन में 51 बच्चों की नृत्य प्रस्तुति को खूब सराहना मिली। मध्य प्रदेश के मटकी, असम के भाओना और केरल के गरुड़न परवा नृत्य का सबने आनंद लिया। हरियाणा के फाग ने तालियां बटोरीं। कलाकारों की पोशाकें लोक परंपरा की अनूठी पहचान पेश कर रही थी।
मालिनी अवस्थी ने ‘हर-हर गंगे चले चलो, कुंभ कुंभ चलो’ से मंत्रमुग्ध कर दिया। कथक और उड़ीसा के छउ नृत्य की कलाकारों ने प्रस्तुति दी। आयोजन में कुंभ पर लिखी पुस्तक स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
दमा दम मस्त कलंदर...
देर रात मास्टर सलीम ने जुगनी, दमा दम मस्त कलंदर और छाप तिलक जैसे गीतों ने कार्यक्रम को खास बना दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, भातखंडे संस्कृति विवि की कुलपति मांडवी सिंह, सोनचिरैया की अध्यक्ष डॉ. विद्या विन्दु सिंह आदि थे।
मंत्री ने महाकुंभ के लिए किया आमंत्रित
मुख्य अतिथि संस्कृति व पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, वे बहुत भाग्यशाली होते हैं जिन्हें महाकुंभ में डुबकी लगाने का अवसर मिलता है। उन्होंने प्रयागराज में 2025 में होने वाले महाकुंभ के लिए सबको आमंत्रित किया।
पहली बार सजा हस्तशिल्प बाजार
देशज में पहली बार हस्तशिल्प बाजार सजा है। इसमें बनारस की सिल्क साड़ियों से लेकर चंदेरी की साड़ियों की दुकानें लुभा रही हैं। पश्मीना शॉल खूब बिक रही है। सिंगरौली से आए दीपक के बांस से बनाए गए उत्पाद भी भा रहे थे। चने की दाल के फरे खुशबू बिखेर रहे हैं।