डॉ. अवधेश कुमार सिंह
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प्रदेश में नेत्र तर्पण कार्यक्रम शुरू होगा। इससे आंखों की रोशनी बचाई जा सकेगी। यह प्रयोग पहले बच्चों पर होगा, जिससे उनकी आंखों से चश्मा हटाया जा सकेगा। प्रदेश में आयुष में नए-नए शोध भी शुरू होंगे। यह कहना है कि प्रदेश की पहली आयुष यूनिवर्सिटी के पहले कुलपति प्रो अवधेश कुमार सिंह का। वह कुलपति नियुक्त होने के बाद अमर उजाला से विशेष बातचीत कर रहे थे।
मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित सुखदीप आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय के निदेशक रहे प्रो अवधेश कुमार सिंह छह जनवरी को गोरखपुर में स्थापित हो रही महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति का पदभार ग्रहण करेंगे। नवनियुक्त कुलपति प्रो अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि आयुष में कई विधाएं बीमारी की रोकथाम में सटीक और दुष्प्रभाव रहित हैं। इन विधाओं को मार्डन साइंस के विशेषज्ञों के साथ मिलकर नए सिरे से संवारने की जरूरत है। प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक कॉलेजों में शोध शुरू क राया जाएगा। योगा, सिद्धा की विधा को भी अलग- अलग सेंटर पर शुरू किया जाएगा।
करीब 84 दवाओं का क्लीनिकल ट्रायल और 70 से अधिक नेशनल और इंटरनेशनल शोध पत्र प्रकाशित करने वाले प्रो. सिंह ने बताया कि कार्यभार ग्रहण करने के बाद पहला प्रयोग सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के साथ मिलकर नेत्र तर्पण किया जाएगा। इसमें शुद्ध घी आंख के चारों तरफ घेरा बनाकर डाला जाता है। इससे दूर व निकट दृष्टि दोष आंखों से सामने अंधेरा छाने जैसी तमाम समस्या खत्म होती हैं। चश्में का नंबर कम हो जाता है। लगातार कंप्युटर या मोबाइल स्क्रीन पर काम करने की वजह से आने वाली समस्या दूर होती है। मध्य प्रदेश में इस पर विस्तृत अध्ययन किया गया, जिसमें करीब 80 फीसदी से अधिक लोगों को फायदा मिला। फिर इसे हर आयुर्वेदिक कॉलेज में बड़े पैमाने पर शुरू कराया जाएगा। इसी तरह सीने के संक्रमण, पेट से जुड़ी बीमारियों और न्यूरो से संबंधित बीमारियां भी आयुष की अलग- अलग विधाओं से ठीक की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि आयुष को पांच साल में गति देने का विस्तृत कार्ययोजना तैयार किया है।
कौन है डा. अवधेश कुमार सिंह
बलिया जिले के बांसडीह निवासी डा. अवधेश कुमार सिंह ने एमडी आयुर्वेद कोलकाता से किया। 1994 में लेक्चरर से कैरियर शुरू करके 2008 में सुखदीप आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय के निदेशक बने। उनके आयुर्वेद पर किए गए शोध को 1999 में अमेरिका में सम्मान मिला। वह कई विश्वविद्यालयों के बोर्ड ऑफ स्टडी मेंबर हैं।