एक मंत्रीजी पिछले कुछ समय से काफी बेचैन चल रहे थे। समझ ही नहीं पा रहे थे कि कई फाइलें कैसे निपटाएं। उनके पीएस व स्टाफ भी मुश्किल में कि हर दो मिनट बाद हुजूर की झिड़की।
दूसरे साथी भी खास मददगार साबित नहीं हो पाए। किसी ने पिछली सरकार वाले मंत्रीजी के रिटायर्ड स्टाफ की तारीफ कर दी।
मौजूदा स्टाफ ने बुलाया था अपनी समझ बढ़ाने के लिए लेकिन जब मंत्रीजी को अपने पीएस की बुद्धि में चमत्कार नजर आया तो उन्होंने इसका रहस्य पूछ लिया।
मौजूदा पीए साहब ने मंत्रीजी को पुराने पीएस साहब का तजुर्बा सुझाया तो उन्हें बात जंच गई। अब मंत्रीजी ने रिटायर्ड पीएस को दफ्तर की जगह घर बुलाना शुरू कर दिया है। इस तजुर्बे का सीधा फायदा नजर आने लगा है।
जो फाइलें महीनों-महीनों तक पड़ी रहती थीं, तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
तमाम नए काम भी निकलने लगे हैं, लेकिन अब मौजूदा पीएस साहब बेचैन हैं कि उन्होंने न जाने किस घड़ी में पुराने वाले को आगे कर दिया था और पुराने वाले के पैर इसलिए जमीन पर नहीं पड़ रहे कि कुछ भी न होने के बावजूद उन्हीं की चलने लगी है...।