मेट्रो को मदद देने के लिए एक यूरोपियन बैंक भी आगे आया है। यूरोपियन यूनियन बैंक के प्रतिनिधि आठ जुलाई को राजधानी आकर यहां मेट्रो रूट का परीक्षण करेंगे और परियोजना की वित्तीय उपयोगिता (फिजीबिलिटी) परखेंगे।
6800 करोड़ रुपये के मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर सरकार को 60 फीसदी लोन की जरूरत है। इसे लेकर कई विदेशी बैंकों से बातचीत की जा रही है। यूरोपियन यूनियन बैंक भी उनमें से एक है।
इससे पहले विश्व बैंक, जापानी वित्तीय संस्थान जाइका और एक फ्रांसीसी बैंक के साथ भी बातचीत जारी है। इस परियोजना के पहले चरण के कुल बजट 6800 करोड़ रुपये में से 4000 करोड़ रुपये के लोन की जरूरत है।
इसके लिए कई बैंकों से बातचीत जारी है। यूरोपियन यूनियन बैंक के प्रतिनिधि भी राजधानी में नार्थ-साउथ कॉरिडोर के 23 किमी लंबे रूट का परीक्षण करेंगे।
इस रूट पर लिया जाने वाला लोन भविष्य में प्रोजेक्ट से होने वाली आय के सापेक्ष होगा। कुल चढ़ने वाले यात्रियों की संख्या जो कि, डीपीआर में उल्लेखित है क्या भविष्य वही मिल जाएगी।
इन्हीं सब का परीक्षण करने के अतिरिक्त मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर अब तक प्रदेश सरकार ने क्या क्या किया है, ये सब यूरोपियन यूनियन बैंक के प्रतिनिधि परखेंगे।
दिल्ली में 10 को प्री बिड कांफ्रेंस
मेट्रो में 541 करोड़ रुपये के सिविल कार्यों का टेंडर कर दिया गया है। इस टेंडर प्रक्रिया में, प्राइमरी सेक्शन के सभी आठ स्टेशनों के लिए उपरिगामी स्टेशन और ट्रैक, मवैया में विशेष स्पैन, 32 वीं वाहिनी पीएसी की भूमि पर डिपो निर्माण और यूटीलिटी ट्रांसफर का काम भी इसी टेंडर के तहत किया जाना होगा।
10 जुलाई को इच्छुक कंपनियों के बीच प्री-बिड कांफ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। यह कांफ्रेंस दिल्ली में होगी, जहां एलएमआरसी की ओर से अधिशासी अभियंता वीके तिवारी मौजूद रहेंगे।
इसके बाद 31 जुलाई तक प्रक्रिया पूरी होगी। 20 अगस्त तक चयनित कंपनी को लेटर ऑफ इंटेंट (एलओई) दे दिया जाएगा।
सितंबर से कंपनी को काम का आगाज करना पड़ेगा। सितंबर 2016 तक कंपनी को यह काम खत्म कर देना होगा।