सूत्रों का कहना है कि डीएचएफएल में निवेश के लिए जिन ब्रोकर फर्मों ने काम किया, उनमें अभिनव की भी हिस्सेदारी थी। अभी तक की जांच में नौ फर्में फर्जी पाई गई हैं। फर्मों के बारे में पूछताछ के दौरान वह गोलमोल जवाब देता रहा और खुद को बेकसूर बताता रहा। वहीं, ईओडब्ल्यू उसके बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य स्थानों पर किए गए निवेश की जानकारी जुटा रहा है।
कई और अफसरों के रिश्तेदारों पर निगाहें
ईओडब्ल्यू यूपीपीसीएल में अपनी सेवाएं दे चुके कुछ और अधिकारियों के रिश्तेदारों पर भी शिकंजा कस सकता है। दावा किया जा रहा है कि उत्तराखंड में रहने वाले एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के तीन करीबी रिश्तेदारों को ब्रोकर फर्मों के जरिये मोटा मुनाफा पहुंचाया गया। ईओडब्ल्यू इसकी भी पड़ताल में जुटा है।