यह एक्सप्रेस-वे 12 जिलों मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेस-वे 6 लेन चौड़ा और आठ लेन विस्तारणीय होगा। एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य प्रगति में है।
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए राज्यस्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन अधिकरण ने शनिवार को पर्यावरणीय मंजूरी जारी कर दी। भारत सरकार की अधिसूचना के तहत इस तरह की परियोजनाओं का निर्माण शुरू करने से पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी जरूरी होती है। अब गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए टेंडर की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर निर्माण कार्य प्रांरभ हो सकेगा।
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इस एक्सप्रेस-वे परियोजना की कुल अनुमानित लागत 36230 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के विकास के लिए पीपीपी (टॉल) मोड पर डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (डीबीएफओटी) पद्धति पर निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। गंगा एक्सप्रेस-वे 594 किमी लंबा और पूरी तरह से प्रवेश नियंत्रित होगा। मेरठ-बुलंदशहर मार्ग पर मेरठ के बिजौली ग्राम के पास से प्रारंभ होकर प्रयागराज बाईपास पर जुडापुर दांदू गांव के पास समाप्त होगा।
मिल चुकी है 94 प्रतिशत भूमि
यह एक्सप्रेस-वे 12 जिलों मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेस-वे 6 लेन चौड़ा और आठ लेन विस्तारणीय होगा। एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य प्रगति में है। अब तक लगभग 94 प्रतिशत भूमि खरीदी या अधिग्रहीत की जा चुकी है।
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निर्माण के दौरान 12 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
इस एक्सप्रेस-वे परियोजना के अंतर्गत लगभग 140 नदी, धारा, नहर और नाला शामिल हैं। इसके 7 आरओबी, 17 इंटरचेंज, 14 बड़े पुल, 126 छोटे पुल, 28 फ्लाईओवर, 946 पुलियों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। निर्माण से रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। अनुमान है कि परियोजना के निर्माण के दौरान लगभग 12000 व्यक्तियों को अस्थाई रूप से काम मिलेगा। टोल प्लाजा के निर्माण से लगभग 100 व्यक्तियों को स्थाई आधार पर रखा जाएगा।