सूबे के 20 जिलों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना फ्लॉप हो गई है। यही हाल रहा तो लोकसभा चुनाव से पहले सड़कें बनाने की शासन की मंशा पूरी नहीं हो पाएगी।
पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ने 31 दिसंबर तक की प्रगति रिपोर्ट तैयार कर ली है और 20 फीसदी से कम प्रगति वाले जिलों के इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
पीएमजीएसवाई में ज्यादातर छोटी-छोटी ग्रामीण सड़कों को शामिल किया जाता है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए अखिलेश सरकार इन सड़कों का निर्माण जल्द से जल्द करा लेना चाहती है।
पिछले महीने ही लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने काम की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई थी। खराब प्रगति वाले जिलों के तीन इंजीनियरों को सस्पेंड भी किया था।
माना जा रहा था कि दिसंबर में स्थिति सुधरेगी, मगर आंकड़े इसके उलट स्थिति बयां कर रहे हैं।
वित्तीय वर्ष के आखिरी तिमाही में भी राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी जिले में महज 14 फीसदी काम हुआ है।
गोरखपुर, जेपी नगर और हमीरपुर में भी प्रगति 20 फीसदी से कम है। इसी तरह हाथरस जिले में महज 21, बिजनौर में 23 और लखनऊ में 38 फीसदी काम ही हुआ है।
बलरामपुर, श्रावस्ती, सीतापुर, हरदोई, चित्रकूट, प्रतापगढ़, गाजीपुर, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली, बरेली, शाहजहांपुर और गौतमबुद्ध नगर में भी कमोबेश यही स्थिति है।
सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट को शासन ने काफी गंभीरता से लिया है। 20 फीसदी से कम प्रगति वाले जिलों के इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना लिया है।
जबकि 50 फीसदी से कम प्रगति वाले जिलों के इंजीनियरों को चेतावनी जारी की जाएगी।