डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने दिमागी बुखार से पीड़ित किशोरी की दिमाग की क्षतिग्रस्त झिल्ली को नाक के रास्ते इंडोस्कोप डालकर भरने में सफलता पाई है।
पीजीआई और केजीएमयू में फिलहाल इंडोस्कोपी से इलाज के अधिकतर मामलों में सिर खोलकर ही सर्जरी की जा रही है।
वहीं, लोहिया संस्थान के डॉक्टरों का दावा है कि वहां के न्यूरो सर्जरी विभाग में इंडोस्कोपी की इस आधुनिक तकनीक से सिर खोले बिना और कम खर्च पर ऑपरेशन हो रहा है।
न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. दीपक सिंह ने बताया कि इस तकनीकी की मदद से इंडोस्कोपी सर्जरी वाले सभी मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं।