लखनऊ। जब बेटियों को शिक्षा का अवसर, विश्वास और संस्थागत सहयोग मिलता है, तो उनकी पढ़ाई केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे कामयाबी के नए कीर्तिमान गढ़ती हैं और समाज को दिशा देती हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय की शोध मेधा छात्रवृत्ति योजना इसी सोच की सशक्त मिसाल बनकर सामने आई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए विश्वविद्यालय से 17 महिला पीएचडी शोधार्थियों का चयन हुआ है।
इन 17 महिला शोधार्थियों को मिला संबल
अदिति, शिवानी तिवारी, शेफाली जावेद, शैलजा दुबे, अंबिका रमोला, तिथि बनर्जी, दीप्ति चौहान, कंचन गौतम, नम्रता दीक्षित, स्मृति सूर्यवंशी, सुरभि उपाध्याय, अंजलि, हेरा तौफीक, साक्षी पाठक, सानिया फिरदौस, अमिता तिवारी और सायमा फरहीन।
ऐसे हुआ बेटियों का चयन
यह छात्रवृत्ति उन छात्राओं के लिए है, जिन्होंने नेट या गेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं लेकिन किसी अन्य फेलोशिप का लाभ नहीं ले पा रही हैं या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आती हैं। लविवि के कुलसचिव की ओर से जारी कार्यालय आदेश के अनुसार चयनित महिला शोधार्थियों को पांच हजार प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाएगी। छात्रवृत्ति की प्रारंभिक अवधि एक वर्ष की होगी, जिसे विभागीय शोध समिति की संस्तुति पर अधिकतम तीन वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। इस योजना के लिए अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. वीके शर्मा की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने पारदर्शी प्रक्रिया के तहत छात्राओं का चयन किया।
कला, विज्ञान और शिक्षा संकायों से जुड़ी ये शोधार्थी अनुभवी शोध पर्यवेक्षकों के मार्गदर्शन में अपने विषयों पर गहन अनुसंधान कर रही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह पहल महिला शोधार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें नवाचार, अकादमिक उत्कृष्टता और सामाजिक बदलाव की अग्रिम पंक्ति में लाने का प्रयास है।