उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदा और पुणे के मालिण में पहाड़ धंसने से हुई बर्बादी हर किसी के सामने है। पर, इस हद की भयावहता वाली कोई आपदा यदि सूबे में कहीं आ जाए तो सूबे की तैयारी नाकाफी मानी जा रही है।
शायद यही वजह है कि प्रदेश सरकार इन आपदाओं से सबक लेती नजर आ रही है। यहां भी जिले स्तर पर ‘इमरजेंसी आपरेशन सेंटर’ की स्थापना को लेकर विचार-विमर्श तेज हो गया है।
प्रदेश में दैवी आपदाओं की ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए इमरजेंसी आपरेशन सेंटर जैसी कार्ययोजना पर विचार के लिए चार अगस्त को गृह विभाग के संयोजन में यहां एक उच्चस्तरीय बैठक की तैयारी है।
इसमें जिले स्तर पर इस तरह के सेंटर की स्थापना व अन्य सुझावों पर चर्चा होगी। आपदा प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं कि प्रदेश में पर्वत न होने की वजह से मालिण जैसी आपदाओं का खतरा नहीं है।
मगर, जिस तेजी से छोटे-छोटे शहरों में भी बहुमंजिला इमारतों और गैस पाइपलाइन पर काम बढ़ रहा है, छोटी सी चूक पर बड़ी आपदाओं की जमीन तैयार हो रही है।