आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने मध्य प्रदेश की सासन परियोजना से कम बिजली मिलने से होने वाली क्षति की भरपाई रिलायंस से कराने की सीएम से मांग की है।
साथ ही कठोर कार्यवाही के लिए मुख्यमंत्री से प्रभावी हस्तक्षेप करने की अपील की है।
फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि कम टैरिफ होने से रिलायंस जान-बूझकर सासन बिजलीघर की इकाई नहीं चला रहा है जो अत्यंत गंभीर मामला है।
पत्र में बताया गया है कि करार के मुताबिक बिजली न मिलने से प्रदेश को महंगी दर से बिजली खरीदनी पड़ी। इससे प्रदेश को 41 करोड़ रुपये की चपत लगी है।
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फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल शैलेंद्र दुबे ने सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (यूएमपीपी) के खराब संचालन के बारे में मंगलवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के साथ प्रभावी हस्तक्षेप की अपील की है।
पत्र में उन्होंने लिखा है कि रिलायंस की सासन परियोजना से यूपी, एमपी, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड को बिजली मिलनी है। परियोजना में यूपी का हिस्सा 12 प्रतिशत है।
करार के अनुसार पहले वर्ष में मिलने वाली बिजली का मूल्य मात्र 69.80 पैसे प्रति यूनिट है। सासन की पहली इकाई चार माह विलंब से 16 अगस्त, 2013 को चली है।
आंकड़ों के अनुसार 16 अगस्त से 24 अक्तूबर तक सासन की इकाई से 27.72 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) पर मात्र 288.922 मिलियन यूनिट बिजली पैदा हुई।
जबकि 100 प्रतिशत पीएलएफ पर इकाई चलाने से 1042.272 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होनी चाहिए थी।
दुबे ने बताया कि कम उत्पादन होने से यूपी को इस अवधि में आवंटन से 94.17 मिलियन यूनिट कम बिजली मिली है।
94.17 मिलियन यूनिट बिजली यूपी को मात्र 69.80 पैसे प्रति यूनिट की दर से मिलती, जबकि बिजली संकट से ग्रस्त प्रदेश को यह बिजली अन्य स्रोतों से लगभग 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदनी पड़ी। इससे प्रदेश को 41 करोड़ रुपये की चपत लगी है।
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