बिजलीघरों को जरूरत भर कोयले की आपूर्ति न होने से सूबे में बिजली संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है। कोयले की कमी के चलते मंगलवार सुबह निजी क्षेत्र के अनपरा ‘सी’ बिजलीघर की 600 मेगावाट क्षमता की एक इकाई बंद हो गई।
पारीछा में 110 मेगावाट और पनकी में 32 मेगावाट क्षमता की इकाई भी बंद हो गई है। परीछा की 250-250 मेगावाट क्षमता की इकाइयों को नाम मात्र लोड पर चलाया जा रहा है।
राज्य के बिजलीघरों का उत्पादन घटकर 2100 मेगावाट के आसपास रह गया है। उधर, केंद्रीय बिजलीघरों की भी कई इकाइयां बंद होने से केंद्र से प्रदेश को 3800-4400 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही है जबकि कोटा 6600 मेगावाट से ज्यादा है। मांग के मुकाबले उपलब्धता काफी कम होने से गांवों से लेकर शहरों तक अतिरिक्त आपात कटौती बढ़ सकती है।
ऐसे हालात, कब तक चलेगा काम!
जैसी कि आशंका थी, पारीछा बिजलीघर में जरूरत भर कोयला नहीं पहुंचा। नतीजतन उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बीती रात दो रैक यानी करीब 7000 मीट्रिक टन कोयला पहुंचा जबकि रोजाना की जरूरत पांच रैक से ज्यादा की होती है।
इकाइयों के पूरी तरह बंद हो जाने से दोबारा चालू करने में वक्त लगता है इसलिए सीमित कोयले का इस्तेमाल करके काफी कम लोड पर चलाया जा रहा है।
250 मेगावाट क्षमता की इकाइयां 50-60 मेगावाट के लोड पर चलाई जा रही हैं। 210 मेगावाट क्षमता की एक इकाई पहले से बंद है जबकि 110 मेगावाट क्षमता की इकाई आज बंद हो गई।
पनकी की भी एक इकाई बंद हुई है जबकि सबसे बड़ा झटका अनपरा ‘सी’ की 600 मेगावाट क्षमता की इकाई के बंद होने से लगा है।
केंद्र सरकार से की है मांग
राज्य सरकार ने केंद्र से प्रदेश के सार्वजनिक
एवं निजी क्षेत्र के बिजलीघरों को पर्याप्त कोयले की आपूर्ति कराने का
अनुरोध किया है।
प्रदेश के निर्धारित बिजली कोटे में बढ़ोतरी के साथ ही
सूबे में दो नए परमाणु उर्जा संयंत्र व अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट लगाने
तथा नई परियोजनाओं को जल्द से जल्द पर्यावरणीय मंजूरी दिलाने व कोल लिंकेज
की व्यवस्था करने की मांग भी केंद्र सरकार से की गई है।
नई
दिल्ली में मंगलवार को राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में राज्य
सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चंद्र
बाजपेई ने ये मांगे रखीं।
उन्होंने कहा कि बीते तीन माह में प्रदेश के सभी
बिजलीघरों को आवश्यकतानुसार कोयले की आपूर्ति न होने से उत्पादन पर असर
पड़ा है।
कोयले की कमी के कारण एनटीपीसी की इकाइयां भी ठप हो गई हैं तथा
कुछ इकाइयां क्षमता से काफी कम उत्पादन कर रही हैं। इससे गंभीर समस्या
उत्पन्न हो गई है और इसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है।
'कोयले की किल्लत के लिए केंद्र जिम्मेदार'
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के बिजलीघरों में कोयले की किल्लत
के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। परिषद का कहना है कि कहीं न
कहीं इसके पीछे देश के कुछ निजी घरानों का हाथ है, जिन्हें केंद्र सरकार
का परोक्ष समर्थन हासिल है।
जबकि हकीकत यह है कि केंद्र की नई सरकार ने 100
दिन में कोयले की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में कोई काम ही नहीं किया जिससे
प्रदेश में गंभीर बिजली संकट खड़ा हो गया है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण
(सीईए) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश
कुमार वर्मा ने कहा कि सीईए के आंकड़ों पर नजर डालें तो 8 सितंबर 2013 तक
प्रदेश के सभी बिजलीघरों में कोयले का कुल स्टॉक 23.52 लाख मीट्रिक टन था
जो इस साल घटकर मात्र 5.78 लाख मीट्रिक टन रह गया है।
इससे साफ है कि पिछली
सरकार में यूपी के बिजलीघरों में कोयले की कमी नहीं थी, अब वर्तमान सरकार
की ओर से ऐसा हुआ जिससे प्रदेश में कोयले की भारी किल्लत हो गई और बिजली का
जबरदस्त संकट खड़ा हो गया है। कहा प्रधानमंत्री को इस मामले में अविलंब
हस्तक्षेप करना चाहिए।