दशहरे पर विद्युत व्यवस्था सुचारू बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने पूरी ताकत लगाई है। कोशिश यह है कि शुक्रवार को बिजली कटौती न हो। इसके लिए अन्य प्राइवेट ट्रेडर्स से भी बात की जा रही है ताकि हर सूरत में बिजली उपलब्ध हो जाए। आलम यह है कि सरकार को महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ी है। उधर, कोयले का संकट अभी बरकरार है और संयंत्र अपनी पूरी क्षमता से विद्युत उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं।
कोयले की कमी के कारण इस समय पूरे प्रदेश में बिजली संकट गहराया हुआ है। गांव से लेकर शहरों तक विद्युत कटौती की जा रही है। उधर त्योहारी सीजन में व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सीएम योगी ने कहा है कि रात को बिजली कटौती न हो। इसके लिए प्राइवेट ट्रेडर्स से महंगी दर पर बिजली खरीदी जा रही है। अब शुक्रवार को दशहरा पर्व पर विद्युत आपूर्ति सही रहे, इसके लिए सरकार ने ताकत लगाई है। चूंकि इस दिन बिजली खर्च ज्यादा होगा तो आशंका यह है कि कहीं निजी ट्रेडर्स के पास भी इसका संकट न हो जाए या रेट बहुत ज्यादा न बढ़ जाए। ऐसे में उन ट्रेडर्स से भी संपर्क किया जा रहा है जिनसे अभी तक बिजली नहीं खरीदी गई है।
सरकार ने बुधवार को 19 रुपये बीस पैसे प्रति यूनिट की दर से 63 करोड़ रुपये में 27 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी। बृहस्पतिवार को शाम तक 16 रुपये 50 पैसे प्रति यूनिट की दर पर 34 करोड़ 82 लाख रुपये में 21 मिलियन यूनिट खरीदी गई। तैयारी यह है कि शुक्रवार को भी इससे ज्यादा बिजली खरीदनी पड़ी तो खरीदी जाएगी।
राहत की बात यह है कि दशहरा पर अवकाश के चलते काफी कार्यालय, काफी औद्योगिक इकाइयां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, स्कूल कालेज बंद रहते हैं जिससे बिजली कम खर्च होगी। बावजूद इसके यदि और ज्यादा बिजली खरीदनी पड़ी तो इसकी पूरी तैयारी है। उधर कोयला संकट के चलते हरदुआगंज में 110 मेगावाट तथा पारीछा में 210 मेगवाट की एक एक इकाई बंद हो गई। यहां कोयला आया पर डिमांड से काफी कम आपूर्ति हुई।