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1008 करोड़ से यूपी में होगा 'चुनावी विकास'

Mon, 16 Dec 2013 12:13 AM IST
महेंद्र तिवारी/लखनऊ
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लोकसभा चुनाव से पहले सूबे में विकास का माहौल बनाने के लिए प्रदेश सरकार कुछ चुनिंदा बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं पर अपना फोकस बढ़ाने जा रही है।
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इस मकसद से ऐसे प्रोजेक्ट लिए जा रहे हैं जिनका असर पूरब से पश्चिम तक नजर आएगा।

शनिवार को मुख्यमंत्री ने जिन परियोजनाओं की शुरुआत के लिए जमीन आवंटन पत्र सौंपा, उनके अलावा इस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (ईडीएफसी) व दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरीडोर (डीएमआईसी) पर तीन अर्ली बर्ड प्रोजेक्ट (प्रारंभिक परियोजनाएं) के साथ औरैया व हरदोई के प्रोजेक्ट इसका जरिया बनेंगे।

केंद्र सरकार ने डीएमआईसी के अर्ली बर्ड प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने के लिए 1008 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दे दी है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पहल पर केंद्र ने ईडीएफसी के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब प्रदेश सरकार इसके अंतर्गत इलाहाबाद में एक इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप का विकास करने की योजना बना रही है।
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इसे उन्नाव में गंगा नदी के तट पर विकसित किए जा रहे कानपुर-उन्नाव ट्रांस गंगा परियोजना की तर्ज पर विकसित करने का प्रस्ताव है।

इलाहाबाद के संगम क्षेत्र में यूपीएसआईडीसी के पास इसके लिए पर्याप्त जमीन भी उपलब्ध है। पूर्वांचल में विकास की तस्वीर दिखाने के लिए सरकार केंद्र से इस परियोजना को ईडीएफसी के अंतर्गत पहले अर्ली बर्ड प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने की सहमति लेने का प्रयास कर रही है।

इस बीच सरकार की एक अन्य पहल को बड़ी कामयाबी मिली है। डीएमआईसी के अंतर्गत प्रदेश में ग्रेटर नोएडा में हाईटेक इंडस्ट्रियल टाउनशिप व दादरी में मल्टीमोडल लाजिस्टिक हब का प्रस्ताव अर्ली बर्ड प्रोजेक्ट के रूप में किया गया था।

केंद्र ने इस पर अपनी सहमति दे दी थी। अब इसके लिए 1008 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दे दी है। प्रदेश सरकार इन दोनों ही प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करने जा रही है।

इसके अलावा प्लास्टिक सिटी औरैया और मेगा लेदर क्लस्टर पार्क हरदोई की गति बढ़ाने की योजना है। परियोजना शुरू करने से पहले की औपचारिकताएं काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं।
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अधिकारी बताते हैं कि इन परियोजनाओं के आगे बढ़ने से वास्तविक बदलाव दिखेगा। शासन की मंशा है कि इन पर इतना तेज काम हो कि आम लोगों को बड़ी-बड़ी बातें जमीन पर भी होती नजर आएं।
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