यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक (ईआईबी) से लखनऊ मेट्रो के नार्थ-साउथ कॉरिडोर (अमौसी से मुंशीपुलिया) के लिए करीब 1600 करोड़ रुपये ऋण मिल सकता है।
रूट परीक्षण और अन्य मुद्दों का अध्ययन करने के बाद इस मुद्दे पर सहमति बनती जा रही है।
बैंक के अधिकारियों के साथ एलएमआरसी और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक में अधिकारियों को ऋण के मुद्दे पर भी सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद है।
ईआईबी के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को मेट्रो रूट पर जबरदस्त भीड़ देख कर माना था कि लखनऊ को मेट्रो रेल सेवा की बहुत जरूरत है।
बैंक की कंट्री हेड फॉर साउथ एशिया सुनीता लुक्खू और डिप्टी इकोनॉमिक एडवाइजर पियर विकर ने 23 किलोमीटर लंबे मेट्रो रूट के निरीक्षण के दौरान पाया था कि रूट पर यात्रियों की संख्या काफी अधिक होगी।
प्रतिनिधियों ने सिटी डेवलपमेंट प्लान और अन्य बिंदुओं पर भी चर्चा की। बुधवार को पूरे दिन एलएमआरसी के कार्यालय में बैठक का दौर चलता रहा।
सुनीता लुक्खू और पियर विकर ने पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण और कुछ अन्य विभागों के अधिकारियों से भी मेट्रो परियोजना को लेकर बातचीत की और उनका फीडबैक लिया।
एलएमआरसी के एमडी राजीव अग्रवाल ने भरोसा जताया कि निश्चित तौर पर ईआईबी के अधिकारी इस परियोजना को ऋण देने को लेकर बहुत ही सकारात्मक हैं।
बैंक की ब्याज दर भी बहुत कम करीब 1.25 से 1.50 फीसदी के करीब होगी। मेट्रो के नार्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए तय किए गए 6800 करोड़ रुपये के कुल बजट में लगभग 3500 करोड़ रुपये के लोन की जरूरत होगी।
इसको लेकर जापानी कंपनी जाइका, एशियन डवलपमेंट बैंक और यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ में लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की बातचीत जारी है।
उन्होंने बताया कि ईआईबी से कुल ऋण के 40 फीसदी से भी अधिक का हिस्सा मिल जाने की उम्मीद है। यह करीब 1600 करोड़ रुपये होगा।
मुद्रा का अंतर लाख टके का सवाल
दरअसल विदेशी ऋण में सबसे बड़ा संकट रुपये और जिस मुद्रा में ऋण लिया जा रहा है, उसका समय-समय पर घटने बढ़ने वाला अंतर होगा।
राजीव अग्रवाल ने बताया कि ईआईबी 1600 करोड़ का ऋण यूरो में देगा। मगर जब हम उनको वापस करेंगे तो यूरो का दाम बढ़ेगा।
हम उनको धन रुपये के माध्यम से वापस करेंगे। ऐसे में जितना धन लेंगे उससे कहीं अधिक वापस करना पड़ेगा। इससे निपटने के लिए भी कुछ विकल्प हैं, जिनको लेकर विचार किया जा रहा है।