पूरा देश जहां आर्थिक विकास दर के मामले में पिछड़ रहा है, वहीं अखिलेश राज में प्रदेश ने तरक्की की है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोक लुभावन योजनाओं से किनारा करते हुए वित्त वर्ष 2014-15 का बजट पेश करते समय सूबे की तरक्की की झलक भी दिखाने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश की विकास दर देश की विकास दर से आगे है और महंगाई चाहे जितनी बढ़ी हो, प्रति व्यक्ति आय में इजाफा हुआ है।
प्रदेश सरकार ने सूबे का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करते हुए बताया कि 2013-14 में प्रदेश की विकास दर 5.2 प्रतिशत रही जो देश की विकास दर 4.9 प्रतिशत से ज्यादा है।
प्रतिव्यक्ति आय में इजाफा
इसी तरह मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2012-13 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 33,137 रुपये थी जो वित्त वर्ष 2013-14 में 4,442 बढ़कर 37,579 रुपये हो गई है।
प्रदेश की वार्षिक योजना में जबर्दस्त वृद्धि का आंकड़ा पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2011-12 से 2014-15 केबीच दोगुना तक वृद्धि का अनुमान है।
बताते चलें इन तीन वर्षों में से दो साल से अखिलेश की ही सरकार है। वर्ष 2011-12 में जहां प्रदेश की वार्षिक योजना का आकार 47,000 करोड़ था वह 2014-15 में 95,309 करोड़ रहने का अनुमान है।
पर राजकोषीय घाटा बढ़ा
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के राजकोषीय घाटे को सीमा के भीतर नियंत्रित कर वित्तीय अनुशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जरूर जताने की कोशिश की लेकिन वह घाटे को पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ने से रोक नहीं सके।
जानकार बताते हैं कि वित्त विभाग राजकोषीय घाटा तीन प्रतिशत से कम पर रखने का लक्ष्य लेकर चलता है। मुख्यमंत्री इस प्रयास में आंकड़ों के लिहाज से तो सफल रहे।
पर, वर्ष 2014-15 में राजकोषीय घाटा 0.03 प्रतिशत बढ़ गया। 2013-14 में राजकोषीय घाटा 23913.29 करोड़ था जो प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद का 2.94 प्रतिशत था।
यह चालू वित्त वर्ष में 28411 करोड़ पर पहुंच गया जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 2.97 प्रतिशत है।