सपा में मचे पारिवारिक घमासान के बीच पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, अमर सिंह व शिवपाल सिंह यादव के साथ लखनऊ पहुंच चुके है।
उम्मीद की जा रही है कि घमासान पर मुलायम, अखिलेश से बात कर सकते हैं। गौरतलब है कि यूपी चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो चुकी है। इसके साथ ही सपा में सुलह के फॉर्मूले को तलाशने की कवायदें और तेज हो गई हैं।
हालांकि, अभी तक हुई बैठकों का कोई परिणाम नहीं निकला है। अखिलेश की शर्तों पर मुलायम सहमत नहीं हुए हैं।
मुलायम सिंह यादव
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वहीं, चुनाव की घोषणा होने के बाद सभी दलों में हलचल बढ़ गई है वहीं सपा अपना आंतरिक विवाद सुलझाने में उलझी है। साइकिल चुनाव चिह्न किसे मिले, ये फैसला अब तक नहीं हो पाया। अब चुनाव आयोग ने मुलायम और अखिलेश गुट से अपने-अपने समर्थन में विधायक, एमएलसी और एमपी का समर्थन का हलफनामा 9 जनवरी तक मांगा है। बताते चलें इसके पहले आज सुबह मुलायम व शिवपाल दिल्ली गए थे।
बता दें कि बीती 1 जनवरी को अखिलेश गुट ने आकस्मिक अधिवेशन बुलाया था। इस अधिवेशन में अखिलेश को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया और अमर सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके बाद से ही सपा में दो फाड़ हो गई। हालांकि मुलायम सिंह ने इस अधिवेशन को असंवैधानिक बताया। अब अखिलेश और मुलायम गुट में चुनाव चिह्न साइकिल को लेकर विवाद है।
बीते दिनों मुलायम सिंह यादव ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखी और अखिलेश के अधिवेशन को असंवैधानिक बताते हुए हलफनामा भी सौंपा। हालांकि अखिलेश गुट के मुताबिक पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा ने इस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी और ऐसी स्थित में अधिवेशन पूरी तरह से वैध है।
मुलायम के चुनाव आयोग से मिलने के बाद अखिलेश गुट से रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने बताया कि आयोग को सारी जानकारी दे दी गई है और फैसला हमारे पक्ष में आने की उम्मीद है।
अखिलेश ने बुलाए विधायक
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
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सीएम ने आज विधायकों की बैठक बुलाई है। बैठक में हिस्सा लेने के लिए विधायक सुबह से ही अखिलेश के आवास पहुंचने लगे।
इसमें विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों के सदस्य शामिल होंगे। विधायकों में अधिकतर प्रत्याशी हैं। माना जा रहा है कि सीएम उनके साथ चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे।
कुछ लोगों को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। सिंबल न मिलने की स्थिति में चुनाव कैसे लड़ा जाए और सिंबल मिलने पर क्या रणनीति रहेगी, इस बारे में विधायकों से मशविरा करेंगे।