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डीएम ने दुर्गा शक्ति नागपाल को दी क्लीन चिट

Thu, 01 Aug 2013 04:09 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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युवा आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के मुद्दे पर यूपी की अखिलेश सरकार घिरती नजर आ रही है।
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सूत्रों के मुताबिक डीएम ने अपनी रिपार्ट में आईएएस दुर्गा को क्लीन चिट दी है।

डीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि दुर्गा ने अपने एसडीएम कार्यकाल के दौरान किसी धार्मिक ढांचे की दीवार नहीं गिराई।

रिपोर्ट के मुताबिक कदालपुर गांव में अतिक्रमण की सूचना मिलने के बाद दुर्गा वहां पहुंची और बातचीत के जरिए ही मामले को सुलझा लिया था।

इसके पहले शिवपाल सिंह यादव ने भी दावा किया था कि दुर्गा का निलंबन वापस नहीं होगा और मुलायम ने भी इस निलंबन को सही ठहराते हुए सरकार की तारीफ की थी।

प्रशासनिक टीम ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से कहा था कि वे या तो इस निर्माण के लिए सरकार से अनुमति लें, या फिर इसे गिरा दें।

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इसके बाद ग्रामीणों ने खुद ही उस ढांचे को गिराने का फैसला किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस घटना के बाद इलाके में किसी तरह का धार्मिक तनाव नहीं था।

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इस मुद्दे पर सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि डीएम की रिपोर्ट पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के खिलाफ यह अफसरों की साजिश है।

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नरेश अग्रवाल ने कि नोएडा के डीएम को सजा मिलेगी। मामले में केंद्रीय मंत्री नारायण सामी के हस्तक्षेप पर सपा सांसद ने कहा, 'अगर नारायणसामी को दुर्गा नागपाल इतनी ही इंमानदार नजर आती हैं तो उन्हें केंद्र सरकार में बुला लें। यूपी को दुर्गा की जरूरत नहीं है।'
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गौरतलब है कि यूपी सरकार ने आईएएस अधिकारी दुर्गा को इस आधार पर निलंबित किया था कि उन्होंने धार्मिक इमारत की दीवार गिराई है। ऐसे में डीएम की रिपोर्ट के बाद सरकार का यह दावा खोखला साबित होता नजर आ रहा है।

इससे पहले रबूपुरा थाने के सीनियर सब इंस्पेक्टर अजय कुमार ने कहा, 'ऐसा कोई तनाव नहीं था। आप मीडियाकर्मियों से पूछ सकते हैं, जो गौतमबुद्ध नगर में मौजूद थे। मेरे पास इस बात पर यकीन करने की पर्याप्त वजह है कि किसी को रविवार रात तक इस तरह का धार्मिक स्थल की दीवार गिरने के बारे में पता ही नहीं था।'
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यह पूछने पर कि क्या वहां पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है, इस पर कुमार ने कहा, 'जब कुछ हुआ ही नहीं, तो केस किसलिए?'

गौतमबुद्ध नगर में स्थानीय पुलिस ने भी इस दलील को दरकिनार करते हुए साफ किया था कि इलाके में ऐसा कोई सांप्रदायिक तनाव नहीं था।
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