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डॉक्टर का दर्द : बहुतों की जान बचाई पर पिता को नहीं बचा सका, लखनऊ के सिविल अस्पताल में नहीं मिला बेड

Sat, 10 Apr 2021 04:01 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

  • डॉ. दीपक ने बताया कि आईसीयू में इलाज करते-करते वह पॉजिटिव हुए। इसके बाद उनके 74 वर्षीय पिता समेत घर के चार लोग संक्रमित हो गए।
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अपने माता-पिता के साथ डॉ. दीपक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मैं खुद डॉक्टर हूं। सिविल अस्पताल में तैनात हूं। अब तक कई मरीजों की जान बचाई, पर जब खुद पर आई तो ध्वस्त सिस्टम से हार गया। अपने पिता तक को नहीं बचा पाया। बुजुर्ग पिता के इलाज के लिए गुहार लगाता रहा, पर समय पर बेड नहीं मिला। इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई। मैं सिस्टम से हार गया... यह दर्द किसी आम नागरिक का नहीं, सिविल अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक का है।

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डॉ. दीपक ने बताया कि आईसीयू में इलाज करते-करते वह पॉजिटिव हुए। वहीं, उनसे 74 वर्षीय पिता समेत घर के चार लोग संक्रमित हो गए। पिता रेलवे से रिटायर्ड अर्जुन चौधरी डायबिटीज और हृदय रोगी थे। उनमें कोरोना के लक्षण महसूस होते ही कोविड अस्पताल से संपर्क किया, पर कोरोना की रिपोर्ट के बिना भर्ती नहीं किया गया। छह अप्रैल को रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कोविड सेंटर को फोन किया, पर जल्द भर्ती का आश्वासन देकर टरकाया जाता रहा। पिता की हालात बिगड़ने पर वह बाजार से ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आए।

बताया कि कोविड कंट्रोल रूम ने बेड तो दूर एंबुलेंस तक नहीं मुहैया कराई। ऐसे में वह अपनी कार से पिता को ऑक्सीजन सपोर्ट पर लोकबंधु अस्पताल लेकर पहुंचे, पर आईसीयू में बेड नहीं मिला। इसके बाद सात अप्रैल को निजी मेडिकल कॉलेज में दोपहर 1:30 बजे बेड मिला। हालांकि, यहां भी इलाज की व्यवस्था ध्वस्त मिली। डॉक्टर उनके पिता को देखने में कोताही करते रहे। इलाज के अभाव में बुधवार शाम उनकी मौत हो गई।

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दाह संस्कार के लिए भी 24 घंटे का इंतजार

डॉ. दीपक के मुताबिक पिता के शव के अंतिम संस्कार में भी मुश्किलें आईं। बताया कि बुधवार शाम पांच बजे पिता की मौत हुई, वहीं दाह संस्कार के लिए गुरुवार शाम पांच बजे नंबर आया। उन्होंने कहा कि अब डॉक्टर होते हुए भी अपने पिता को नहीं बचा पाया।

सीएमओ डॉ. संजय भटनागर का कहना है कि डॉक्टर के पिता की मौत की जानकारी नहीं है। कोविड अस्पताल व आईसीयू के बेड बढ़ाए जा रहे हैं।
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