राजधानी में फ्लैटों के निर्माण से एक दम चमका रियल एस्टेट भारी मंदी के दौर से गुजर रहा है। इसकी मार आवास विकास परिषद और लखनऊ विकास प्राधिकरण पर भी पड़ी है।
इस साल फ्लैटों की डिमांड में 60 फीसदी की गिरावट आई है। शहर में करीब 25,000 फ्लैट खाली पड़े हैं, लेकिन खरीदारों का पता नहीं। रियल एस्टेट के विशेषज्ञों का दावा है कि यह स्लोडाउन अगले दो साल तक रहेगा।
त्यौहारी सीजन के बाद भी फ्लैटों की बिक्री बढ़ने वाली नहीं है। फ्लैटों की बिक्री घटने का सीधा असर इनकेनिर्माण में कमी केरूप में देखने को मिल रहा है।
रियल एस्टेट की सबसे बड़ी संस्था कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) जहां मान रही है कि बिक्री में 60 प्रतिशत तक की गिरावट रही है, वहीं एलडीए के मुताबिक पिछले एक साल में ग्रुप हाउसिंग यानी फ्लैटों के निर्माण के लिए एक भी नक्शा पास नहीं कराया गया है।
शहीद पथ के आसपास सबसे ज्यादा फ्लैट बन रहे हैं। एलडीए की गोमतीनगर विस्तार और आवास विकास परिषद की अवध विहार योजना ने यहां निजी डवलपर्स को भी आकर्षित किया। निर्माण भी तेजी से हुआ, पर सब ठप पड़ा है।
सुशांत गोल्फ सिटी जैसी टाउनशिप तक में फ्लैटों का निर्माण बंद है। यही हाल गोमतीनगर विस्तार के सेक्टर-4, सेक्टर-6, सेक्टर-7 में बने फ्लैटों का है। आवास विकास की वृंदावन योजना में भी अब परिषद और निजी डवलपर्स के प्रोजेक्टों में फ्लैटों की बिक्री और निर्माण दोनों थमे हुए हैं।
क्या है वजह?
- मांग से ज्यादा आपूर्ति हो गई
- फ्लैटों में निवेशकों की दिलचस्पी घटी
- असली ग्राहकों की फ्लैटों से बनी दूरी
- फ्लैट के बजाय प्लॉट को प्राथमिकता
- फ्लैट की कीमतों का तेजी से बढ़ना
- डवलपर ग्राहकों की जरूरतों को नहीं समझ सके
- अफोर्डेबल हाउसिंग की जगह बिल्डर्स का लग्जरी सेगमेंट में झुकाव