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मकानों की बिक्री में 60 प्रतिशत तक गिरावट

Tue, 18 Oct 2016 12:48 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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डेमो
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राजधानी में फ्लैटों के निर्माण से एक दम चमका रियल एस्टेट भारी मंदी के दौर से गुजर रहा है। इसकी मार आवास विकास परिषद और लखनऊ विकास प्राधिकरण पर भी पड़ी है। 
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इस साल फ्लैटों की डिमांड में 60 फीसदी की गिरावट आई है। शहर में करीब 25,000 फ्लैट खाली पड़े हैं, लेकिन खरीदारों का पता नहीं। रियल एस्टेट के विशेषज्ञों का दावा है कि यह स्लोडाउन अगले दो साल तक रहेगा।

त्यौहारी सीजन के बाद भी फ्लैटों की बिक्री बढ़ने वाली नहीं है। फ्लैटों की बिक्री घटने का सीधा असर इनकेनिर्माण में कमी केरूप में देखने को मिल रहा है।

रियल एस्टेट की सबसे बड़ी संस्था कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) जहां मान रही है कि बिक्री में 60 प्रतिशत तक की गिरावट रही है, वहीं एलडीए के मुताबिक पिछले एक साल में ग्रुप हाउसिंग यानी फ्लैटों के निर्माण के लिए एक भी नक्शा पास नहीं कराया गया है।
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शहीद पथ के आसपास सबसे ज्यादा फ्लैट बन रहे हैं। एलडीए की गोमतीनगर विस्तार और आवास विकास परिषद की अवध विहार योजना ने यहां निजी डवलपर्स को भी आकर्षित किया। निर्माण भी तेजी से हुआ, पर सब ठप पड़ा है। 

सुशांत गोल्फ सिटी जैसी टाउनशिप तक में फ्लैटों का निर्माण बंद है। यही हाल गोमतीनगर विस्तार के सेक्टर-4, सेक्टर-6, सेक्टर-7 में बने फ्लैटों का है। आवास विकास की वृंदावन योजना में भी अब परिषद और निजी डवलपर्स के प्रोजेक्टों में फ्लैटों की बिक्री और निर्माण दोनों थमे हुए हैं।

क्या है वजह?
- मांग से ज्यादा आपूर्ति हो गई
- फ्लैटों में निवेशकों की दिलचस्पी घटी
- असली ग्राहकों की फ्लैटों से बनी दूरी
- फ्लैट के बजाय प्लॉट को प्राथमिकता

- फ्लैट की कीमतों का तेजी से बढ़ना
- डवलपर ग्राहकों की जरूरतों को नहीं समझ सके
- अफोर्डेबल हाउसिंग की जगह बिल्डर्स का लग्जरी सेगमेंट में झुकाव
 
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अब सस्ते फ्लैट बनाने पर फोकस

डेमो
मल्टी स्टोरी बनाने से बच रहे डवलपर्स
एलडीए के मानचित्र सेल के प्रभारी राहुल श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले एक साल से ग्रुप हाउसिंग का एक भी नक्शा पास नहीं हुआ है। कोई भी बिल्डर किसी प्रोजेक्ट पर काम करने से पहले मूलभूत जरूरतें पूरी नहीं करता।मेरा मानना है कि पिछले सालों में तेजी से बने फ्लैटों को ग्राहक नहीं मिल पाने से अब बिल्डर ग्रुप हाउसिंग से दूरी बना रहे हैं।

ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट भी नहीं बिक रहे
एलडीए के संयुक्त सचिव एनएन सिंह का कहना है कि सीजी सिटी जैसी प्राइम लोकेशन में भी ग्रुप हाउसिंग के 10 में से आठ भूखंड नहीं बिक रहे हैं। गोमतीनगर विस्तार योजना में भी ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट नहीं बिक पा रहे हैं। सीजी सिटी के भूखंडों के लिए एलडीए दो बार नीलामी की प्रक्रिया कर चुका है। यही हाल आवास विकास के प्लॉटों का है।  आवास विकास ने अवध विहार योजना, वृंदावन योजना के  भूखंडों केलिए एक बार फिर से नीलामी की प्रक्रिया शुरू की है।

कितने फ्लैट कहां नहीं बिक रहे
एलडीए- 3500
आवास विकास- 4000
सुशांत गोल्फ सिटी- 5500
गोमतीनगर विस्तार, निजी डवलपर्स - 6000
कानपुर रोड - 1500
रायबरेली रोड - 2000
फैजाबाद रोड- 2500

फ्लैटों की बिक्री में गिरावट आने के बाद अब सरकारी और निजी डवलपर्स दोनों की नीतियां बदलने लगी हैं। एलडीए जहां अब 30 लाख रुपये से कम कीमत केफ्लैट बनाने पर फोकस कर रहा है, वहीं आवास विकास भी अब छोटी-छोटी योजनाएं बनाकर विकास कराएगा। निजी डवलपर्स भी अब 50 लाख रुपये अधिकतम कीमत के फ्लैट को ध्यान में रखकर अपने प्रोजेक्टों को री-डिजाइन कर रहे हैं।

 
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