डॉ. राजीव रंजन
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लोहिया संस्थान के डॉ. राजीव रंजन का कहना है कि जब हम तेज बोलते हैं तो मुंह या सांसों के जरिये कुछ बूंदे निकलती हैं, जो करीब 5 माइक्रोन से भी कम होती हैं। इसे ड्रॉपलेट कहा जाता है। संक्रमित व्यक्ति के सांस छोड़ने या खांसने से यह हवा में जा सकती हैं। ऐसे में मास्क बचने का सबसे बेहतर तरीका है।
हमें मालूम नहीं होता कि कौन संक्रमित है, इसलिए हम मास्क लगाकर हर व्यक्ति को संक्रमित मानते हुए खुद की सुरक्षा कर सकते हैं। यह कोई जरूरी नहीं है कि बहुत महंगा मास्क खरीदें। कपड़े के मास्क से काम चल सकता है। कपड़े का मास्क लगाने के बाद अगर फूंक मारने पर मोमबत्ती नहीं बुझती है तो समझे कि आपका मास्क सुरक्षा करने में कारगर है।