केजीएमयू के चिकित्सकों ने 26 वर्षीय मजदूर संजय के पेट में घुसा सरिया निकाल कर उसकी जान बचा ली। उसके मलाशय में घुसी सरिया को लगभग दो घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद बाहर निकाला जा सका।
इस सरिया की वजह से उसका यूरीनरी ब्लैडर (मूत्राशय), बड़ी आंत और मलाशय क्षतिग्रस्त हो गया था। पेट खोल कर उसके क्षतिग्रस्त अंगों को देखते हुए पहले सरिया को पीछे के रास्ते से बाहर निकाला। इसके बाद उसके अंगों को ठीक किया गया। मरीज अब स्वस्थ है।
सर्जन डॉ. विनोद जैन ने बताया कि शुक्रवार रात को तीन बजे संजय को लेकर उसके साथी ट्रॉमा सेंटर पहुंचे थे। संजय की हालत देखकर उसे तुरंत ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया गया और उन्हें सूचना दी गई। सीटी स्कैन, एक्स-रे कराने पर पाया गया कि आगे से मुड़ी हुई सरिया ने पेट में कई अंगों को क्षतिग्रस्त कर दिया है।
इसके बाद मरीज के ऑपरेशन की तैयारियां शुरू की गईं। ट्रॉमा सेंटर के सह प्रभारी डॉ. विनोद जैन, डॉ. समीर मिश्रा के साथ सीनियर रेजीडेंट डॉ. प्रार्थना सक्सेना और डॉ. श्रेय जैन की टीम ने शनिवार सुबह 7.30 बजे सर्जरी शुरू की।
शरीर को टेढ़ाकर करनी पड़ी सर्जरी
डॉ. विनोद जैन ने बताया कि संजय की सर्जरी में सबसे बड़ी दिक्कत ये थी कि उसे पीठ के बल लेटाया नहीं जा सकता था। इसलिए पहले तो बेहोशी के लिए एनेस्थीसिया देने में दिक्कत आयी। उसे करवट ही लेटाकर बेहोशी के लिए ट्यब डाली गई। इसके बाद सर्जरी के लिए पेट खोला गया।
लगभग आठ इंच का चीरा लगाकर पेट के रास्ते देखा गया कि सरिया से कौन-कौन से अंग क्षतिग्रस्त हुए हैं? सरिया से यूरीनरी ब्लैडर (मूत्राशय), बड़ी आंत और मलाशय को नुकसान पहुंचा था। लेकिन एक अच्छी बात ये भी रही कि खून ले जाने वाली कोई भी नस क्षतिग्रस्त नहीं हुई थी जिससे अधिक रक्तस्राव नहीं हुआ।
इसके बाद बड़ी आंत, मलाशय और मूत्राशय को सुरक्षित करते हुए सरिया को उनसे अलग किया गया। इसके बाद मलद्वार (एनल) के रास्ते सरिया को स्क्रू की तरह घुमाते हुए धीरे-धीरे बाहर निकाला गया। सरिया निकालने के बाद, क्षतिग्रस्त अंगों को दुरुस्त किया गया।
पेट में भर गया था मल व मूत्र
डॉ. विनोद जैन ने बताया कि मलाशय व मूत्राशय क्षतिग्रस्त होने के कारण पूरे पेट में गंदगी फैल गई थी। इसकी वजह से संजय को संक्रमण का खतरा था। इसलिए पेट से गंदगी को बाहर निकाला गया। दोबारा क्षतिग्रस्त अंगों से गंदगी निकलकर पेट में न फैले इसलिए ‘कोलोस्टमी’ की गई।
इसमें पेट की सर्जरी कर एक रास्ता बना दिया जाता है और एक पाउच को बड़ी आंत से जोड़ दिया जाता है। इसी में सारी गंदगी इकठ्ठा होती है। मलाशय के ठीक हो जाने के बाद इस रास्ते को बंद कर दिया जाएगा।
साथी ने की थी सरिया निकालने की कोशिश
संजय ने ये तो नहीं बताया कि सरिया उसके कैसे घुसी लेकिन उसने सरिया निकालने के लिए अपनी साथी की मदद ली थी। खींचने और हिलाने-डुलाने के कारण उसके अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचा।
यदि और ज्यादा कोशिश की जाती तो हो सकता है कि कोई रक्तवाहिनी भी क्षतिग्रस्त हो जाती। इससे संजय की जान भी जा सकती थी।
डॉ. विनोद जैन ने बताया कि एक निजी डेवलपर के पास मकान बनाने का कार्य कर रहे संजय को उसके साथी पहले डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गए थे। जहां से चिकित्सकों ने उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया।