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सर्जरी के बाद पेट से पाइप निकालना भूल गए डॉक्टर साहब

Thu, 11 Jun 2015 09:16 AM IST
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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एरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉक्टरों की लापरवाही ने एक दिहाड़ी मजदूर की जान जोखिम में डाल दी है। चार साल पहले यहां के डॉक्टरों ने इंदिरा नगर निवासी अंबिका प्रसाद मौर्य (30) की किडनी में पथरी का ऑपरेशन किया।
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पेट के अंदर स्टेंट (ड्रेन पाइप) लगाया,पर उसे निकालना ही भूल गए। मरीज को उसे निकलवाने के बारे में भी नहीं बताया। दर्द नहीं गया तो दोबारा ऑपरेशन कर दिया। दोनों ऑपरेशनों के 85 हजार रुपये वसूल लिए। फिर भी दर्द नहीं गया तो उसे दवा खिलाते रहे।

सीएमओ डॉ.एसएनएस यादव ने बताया कि मरीज ने कागजात और जांच रिपोर्ट के साथ शिकायत की है। इस मामले में ऑपरेशन करने वाले एरा मेडिकल कॉलेज के डॉ.एमएसडी जायसवाल और डॉ.सलीम ताहिर से पूछताछ की जाएगी।
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चार साल से पेट में पड़ा है पाइप

केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. एसएन शंखवार बताते हैं कि स्टेंट एक से तीन महीने के बीच निकाल दिया जाना चाहिए। लंबे समय तक पड़े रहने से स्टेंट समस्या खड़ी कर सकता है।

सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे बताते हैं,चार साल तक स्टेंट भीतर पड़े रहने से अंबिका के पेट के भीतर सूजन और मांसपेशियों में दिक्कत होने से उसे हमेशा दर्द बना रहता है।

अंबिका ने सोमवार को जब एक प्राइवेट यूरोलॉजिस्ट को दिखाया तो मामला सामने आया। मंगलवार को अंबिका ने सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव से इसकी शिकायत कर दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

अंबिका बताते हैं कि 5 नवंबर 2011 को एरा हॉस्पिटल के प्रो. एमएसडी जायसवाल और सलमान ताहिर ने उसका ऑपरेशन किया।

इलाज में अब तक एक लाख से ज्यादा खर्च हो गया। खेत गिरवी रखना पड़ा। मजदूर हूं,कब तक इलाज कराता। पिछले साल दवा लेना बंद कर दिया। दर्द बेतहाशा बढ़ गया तो 8 जून को जांच कराया।
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पाइप निकालने के मांग रहे हैं 30 हजार रुपए

रिपोर्ट में सामने आया कि किडनी में अब भी स्टोन है। स्टेंट भी पड़ा हुआ है। मंगलवार को रिपोर्ट लेकर प्रो. एमएसडी जायसवाल के घर पहुंचा तो उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद ही इसे निकाल दिया जाना चाहिए था।

स्टेंट निकालने के लिए 30 हजार रुपये मांग रहे हैं। अपनी गरीबी का हवाला दिया तो कहा- एरा मेडिकल कॉलेज छोड़ चुका हूं,बिना पैसे के ऑपरेशन मुश्किल है।

मैंने नहीं किया ऑपरेशन
अंबिका का ऑपरेशन 2011 में हुआ था। तब मैं प्रिंसिपल था और प्रिंसिपल ऑपरेशन नहीं करता है। मैं गैस्ट्रो का डॉक्टर हूं और केस किडनी का था।ऑपरेशन किसने किया और कहां गड़बड़ी हुई इसकी जानकारी एरा मेडिकल कॉलेज से रिकॉर्ड मंगाने पर ही पता चलेगी।
                                प्रो.एमएसडी जायसवाल,सेवानिवृत्त सर्जन,एरा मेडिकल कॉलेज
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