इसके लिए सिविल के दो डॉक्टर व तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। इन्होंने पहले कोरोना की जांच रिपोर्ट आने की बात कही, लेकिन अधिकारी नहीं माने। बुधवार दोपहर रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो हड़कंप मच गया। सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है श्रमिक के कोच में सवार लोगों की सूची मांगी गई है।
केजीएमयू की पैथोलॉजी में दो घंटे में कोरोना की जांच रिपोर्ट आ जाती है। इसके बाद भी अफसरों ने बिना रिपोर्ट का इंतजार किए देर रात शव का पोस्टमार्टम करवा दिया।
रिपोर्ट के बाद 23 शवों का पोस्टमार्टम
पोस्टमार्टम हाउस में शव के कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि के बाद बुधवार को 23 शवों के पोस्टमार्टम हुए, जिसमें कुछ सीतापुर और बाराबंकी के भी थे। इन सभी शवों को ले जाने वाले परिजन और उनके क्रियाकर्म में शामिल लोगों में भी संक्रमण की आशंका पैदा हो गई है। वहीं, बिना किसी एहतियात के ही शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया। इनके भी संक्रमित होने की आशंका प्रबल हो गई है।
ट्रेन से पोस्टमार्टम हाउस तक कितने संपर्क में आए, पता लगाना कठिन
महाराष्ट्र से आ रहे श्रमिक की ट्रेन में मौत और उसके शव के पोस्टमार्टम तक कितने लोग संपर्क में आए, इसका अनुमान लगाना संभव नजर नहीं आ रहा। ट्रेन में श्रमिक के साथ जितने लोग थे, वे संक्रमित हुए होंगे तो घर, बाहर संक्रमण फैला रहे होंगे।
शव उठाने वाले जीआरपी कर्मचारी, जिस वाहन में शव लाया गया उसके चालक-परिचालक, मर्च्युरी में शव के संपर्क में आने वाले डॉक्टर-कर्मचारी, शव ले जाने वाले मृतक के करीबियों से लेकर लंबी श्रृंखला बन रही है।
पोस्टमार्टम हाउस बंद कर दिया गया है। लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया कि रोज आने वाले शवों को कहां रखा जाएगा। बीते पांच-छह दिन से पोस्टमार्टम हाउस में रोजाना 20 से 25 शव आ रहे हैं।
- कई दिन से भूखा-प्यासा था श्रमिक, खाली मिला पेट: ट्रेन में मृत मिला श्रमिका भूखा और प्यासा था। पोस्टमार्टम में उसका पेट खाली मिला। पेट में पानी तक नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक श्रमिक की मौत सोमवार दोपहर किसी वक्त हुई होगी।
- सिर्फ मास्क लगाए थे ड्राइवर, गार्ड: पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पीपीई किट पहने थे। हालांकि, शव ले जाने वाले ड्राइवर व गार्ड सिर्फ मास्क लगाए थे।