‘सिया राम मय सब जग जानी, करहु प्रनाम जोरि जुग पानी’। रामकथा कहने वालों के इच्छुक लोगों को इसकी पढ़ाई कराई जाएगी। अयोध्या शोध संस्थान ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। देश में यह अपनी किस्म का पहला कोर्स बताया जा रहा है।
अयोध्या शोध संस्थान की ओर से इस कोर्स को मान्यता समेत कई बिंदुओं का प्रस्ताव बीते दिनों शासन को भेज दिया गया है। वहां से मुहर लगते ही यह पाठ्यक्रम शुरू हो जाएगा।
संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह ने बताया कि अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद के सहयोग से छह महीने का डिप्लोमा कोर्स चलाया जाएगा। स्नातक के बाद इसमें दाखिला लिया जा सकेगा। इसमें अभी उम्र सीमा की बाध्यता नहीं रखी गई है।
कोशिश रहेगी कि इसकी फीस उतनी ही रहे ताकि जेब पर भारी न पड़े। दूसरे देशों में भी एक दशक से रामकथा वाचकों की मांग तेजी से बढ़ी है। इसे देखते हुए अंग्रेजी में भी पढ़ाई की सुविधा रहेगी।