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लखनऊ गैंगरेप: लाज बचाने मैदान में उतरे DIG!

Wed, 23 Jul 2014 01:17 PM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
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पुलिस का कहना है कि बहुचर्चित मोहनलालगंज कांड में मृतक महिला के नाखूनों से बरामद अवशेष की डीएनए जांच में साबित हो गया है कि बचाव के लिए आरोपी रामसेवक यादव से ही उसने संघर्ष किया था।
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सिक्योरिटी गार्ड रामसेवक के शरीर पर खरोंच के नौ निशान पाए गए थे। महिला के साथ जोर-जबर्दस्ती के दौरान उसे ये खरोंचें आई थीं।

डीआईजी नवनीत सिकेरा ने मंगलवार को यह दावा किया। हालांकि सिकेरा ने कहा कि उन्हें अभी इसकी लिखित रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने मौखिक जानकारी में उपरोक्त बातें कही हैं।
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नहीं बताया, गार्ड का बयान

मोहनलालगंज कांड में पुलिस के लचर खुलासे पर उठ रहे सवालों के जवाब में डीआईजी सिकेरा ने यह दावा तब किया जब इस मामले की तफ्तीश सीबीआई को दिए जाने के आसार बन गए हैं।

ऐसे में एनेक्सी के मीडिया सेंटर में डीआईजी नवनीत सिकेरा जहां इस कांड से जुड़े कई सवालों के जवाब नहीं दे सके, वहीं कई सवालों के जवाब में बस इतना बोले कि इनके जवाब देना इसलिए मुमकिन नहीं क्योंकि यह महिला के सम्मान के खिलाफ होगा।

कलमबंद बयान में आरोपी ने कुबूल किया जुर्म
डीआईजी ने दावा किया कि आरोपी गार्ड रामसेवक ने 164 के कलमबंद बयान में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है।

डीएनए जांच के मिलान और रामसेवक के जुर्म कुबूल कर लेने के बाद अब मामले के खुलासे को लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए। हालांकि डीआईजी यह नहीं बता सके कि रामसेवक ने अपने इकबालिया बयान में क्या कहा है।

चोरी का सिम हुआ इस्तेमाल

डीआईजी ने कहा कि महिला रामसेवक के साथ मोटर साइकिल पर गई थी। घर से निकलते समय महिला व रामसेवक के मोबाइल की लोकेशन अलग थी लेकिन बाद में दोनों के मोबाइल की लोकेशन एक ही टॉवर की मिली है।

महिला से बात करने के लिए रामसेवक जिस सिमकार्ड का प्रयोग कर रहा था, वह चोरी का था। यह सिमकार्ड अजीज नाम के युवक का था।

अजीज से पूछताछ में सामने आया कि उसका मोबाइल कुछ दिन पहले गिर गया था, जो रामसेवक को मिला। उसने मोबाइल फेंक दिया और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहा था।

उन्होंने कहा कि पहले पुलिस को अजीज पर शक हुआ, पर जब यह पुख्ता हो गया कि वारदात के समय वह घटनास्थल पर नहीं था, तब रामसेवक पर शक अधिक गहराया।

गलतबयानी कर रहा था रामसेवक

डीआईजी ने कहा कि रामसेवक ने वारदात के समय घटनास्थल के बजाय कहीं और होने की बात कही थी, जबकि उसके परिवार के सदस्य कुछ और जानकारी देते रहे।

सभी के बयान विरोधाभासी थे। इसके बाद ही रामसेवक से पूछताछ का सिलसिला तेज किया गया और आखिरकार उसका दोष सामने आ गया।

अजीज के सिम की तलाश जारी
डीआईजी ने कहा कि रामसेवक ने बताया था कि अजीज का सिमकार्ड उसने एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में लिफ्ट के नीचे के गड्ढे में फेंक दिया था। उस गड्ढे में पानी व मलबा भरा हुआ था।

पुलिस ने गड्ढे को खाली कराकर सिम खोजने की काफी कोशिश की, लेकिन सिम नहीं मिला। अजीज का सिमकार्ड विवेचना के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, इसलिए सिम कार्ड की तलाश जारी है।
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चाभी से निजी अंगों पर किया हमला

डीआईजी ने कहा कि महिला के मुंह, सिर व हाथ आदि में पाई गई कोई भी चोट जानलेवा नहीं थी। उसके निजी अंगों पर आई चोटों से हुए अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से ही उसकी मौत हुई।

यह चोट कैसे आई, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि रामसेवक ने अपनी मोटरसाइकिल की चाभी से हमला करने की बात कही है।

उसका एक गहरा निशान महिला के मुंह पर भी था। पुलिस ने इस चाभी को कब्जे में ले लिया है।
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