नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रदेश में हुई हिंसा को लेकर डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने कहा है कि हिंसा में बाहरी तत्वों के शामिल होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लखनऊ में हुई हिंसा में कुछ ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिसमें बाहरी तत्वों के शामिल होने का शक है। प्रदर्शन में कौन-कौन लोग शामिल थे, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है और सभी एंगिल पर जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि कुछ एक दो घटनाओं को छोड़ कर पूरे प्रदेश में स्थिति सामान्य है। एहतियात के तौर पर कानून व्यवस्था को बनाए रखने केलिए पुलिस प्रबंध को चाक चौबंद और चौकन्ना रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी भागों में पुलिस पेट्रोलिंग कराई जा रही है। सेक्टर स्कीम लागू है।
डीजीपी ने बताया कि शहर के गणमान्य लोगों से वह खुद संपर्क में हैं और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। जहां-जहां प्रदर्शन हुए हैं और मुकदमे दर्ज हुए हैं, वहां-वहां स्थानीय प्रशासन प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियां कर रहा है। लखनऊ में अब तक 218 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
डीजीपी ने भरोसा दिलाया कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। पूरी छानबीन के बाद ही कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि हिंसा में जो लोग शामिल रहे हैं उनमें से किसी को बख्शेंगे नहीं। इंटरनेट सेवा कितने जिलों में बंद की गई है, इस सवाल केजवाब में उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने जहां-जहां उचित समझा है, वहां की इंटरनेट सेवाएं बंद की गई हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों में भेजा गया
वहीं पुलिस अधिकारियों को जिलों में स्थिति संभालने के लिए भेजा गया है। आईजी लोक शिकायत नवीन अरोड़ा को बिजनौर भेजा गया है। जबकि रामपुर में डीआईजी पीएसी अखिलेश कुमार मीणा को भेजा गया है। एडीजी संदीप सालुंके को संभल की स्थिति संभालने के लिए भेजा गया है।
लखनऊ में स्थिति नियंत्रित होने के बाद यहां लगाए गए राजेश मोदक को कानपुर भेजा गया है। एडीजी अभियोजन आशुतोष पांडेय अब भी मऊ में कैंप कर रहे हैं। फिरोजाबाद की स्थिति संभालने के लिए आगरा के आईजी ए सतीश गणेश को फिरोजाबाद में ही कैंप करने के लिए कहा गया है।