विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद जमीन फ्री होल्ड कराने के नाम पर अब मनमानी वसूली नहीं कर सकेंगे। राज्य सरकार शासनादेश के आधार पर वसूली की व्यवस्था समाप्त करते हुए नियमावली के जरिये यह व्यवस्था लागू करने जा रही है।
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने इसके लिए नियमावली तैयार कर ली है। इसे जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की तैयारी है।
विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद लोगों को जमीन आवंटित करते हैं। इन जमीनों की रजिस्ट्री कराने से पहले इसे फ्री होल्ड करने के एवज में कई तरह के शुल्क वसूले जाते हैं।
इसमें सरचार्ज, वाटर-सीवर चार्ज और मलबा चार्ज शामिल है। मलबा चार्ज नक्शा पास करते समय लिया जाता है। यह भवन के कुल क्षेत्रफल के आधार पर होता है।
सरचार्ज सर्विस टैक्स का एक से दो फीसदी और वाटर-सीवर चार्ज ईडब्ल्यूएस से 1000 तथा इससे बड़े प्लाट पर 3000 रुपये लिया जाता है। आवास विभाग ने इसका निर्धारण पांच साल पहले किया था।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दे रखा है कि कोई भी वसूली बिना नियमावली के नहीं हो सकती। इसलिए आवास विभाग ने वाटर-सीवर चार्ज, सरचार्ज व मलबा चार्ज के लिए अलग से नियमावली का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी के लिए रखा जाएगा।