वार्डों में विकास का एजेंडा पार्षद और आम जनता के सुझाव से तय होंगे। इसके आधार पर नगर निगम विकास कार्यों के प्रस्तावों पर मुहर लगाएगी।
नगर विकास विभाग लोकसभा चुनाव के बाद इस व्यवस्था को अमली जामा पहनाने की तैयारी कर रहा है। नतीजतन शहरी क्षेत्रों के विकास कार्यों में अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों की मनमानी नहीं चलेगी।
मौजूदा समय शहरों में विकास कराने के लिए प्रस्ताव बनाने की जिम्मेदारी अधिकारियों व अभियंताओं के पास है। एक लाख से अधिक के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार महापौर और निकाय अध्यक्षों के पास है।
इसके चलते अधिकारी व अभियंता अपने हिसाब से प्रस्ताव तैयार करते हुए विकास कार्य कराते हैं। इससे कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ही विकास कार्य हो पाते हैं।
इसमें न तो क्षेत्रीय पार्षद की भूमिका होती है और न ही आम जनता की। लेकिन नगर विकास विभाग चाहता है कि शहरी क्षेत्रों में विकास एक समान हो। इसके लिए वार्ड स्तर पर कमेटियां बनाई जाएंगी।
वार्ड कमेटी का अध्यक्ष पार्षद होगा। इसमें क्षेत्रीय जोनल अधिकारी, अधिशासी व अवर अभियंता के साथ जनता की भागीदारी होगी। विकास कार्य के प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी वार्ड कमेटी के पास होगी।
इसी आधार पर ही वार्डों में विकास कराया जाएगा। इसके अलावा वार्डों में स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति के लिए नए पंप लगवाने और हाउस व वाटर टैक्स वसूली में भी इस कमेटी की अहम भूमिका होगी।