डॉ दिनेश शर्मा कहते हैं कि उसके बाद जहां भी प्रचार के लिए गया लोगों ने कहा अटलजी को कुर्ता तो दे दिया है, अब पायजामा भी देंगे। जाओ निश्चिंत रहो. डॉ दिनेश शर्मा ने कहा जहां चुनाव में पैसे चल रहे थे वहीं, मैं अटलजी के एक वाक्य से जीत गया।
डॉ शर्मा ने कहा कि, इसके बाद मैं दिल्ली गया। उस समय मदनलाल खुरानाजी, साहेब सिंह वर्माजी, कोहली जी और कुछ अन्य लोग किसी विषय पर विचार-विमर्श कर रहे थे। मेरे पहुंचते ही उन्होंने मुझे गले से लगाया।
मथुरा का पेड़ा अपने हाथ से मुझे खिलाया। मैंने कहा कुछ दिन पहले दर्शन करके आया हूं। माननीय अटलजी से मिलना था। अटलजी के परिजन के लोग वहां मौजूद थे।उन्होंने कहा जाओ कुछ बोलो शायद वे कुछ कहें। कान में जाकर मैंने कहा बापजी 'मैं डॉक्टर आपका मेयर आया हूं। उन्होंने पूछा कैसे हो।'
डॉ. शर्मा कहते हैं कि अटलजी अपने आप में विराट व्यक्तित्व हैं। आज उनकी तुलना विश्व में किसी से नहीं की जा सकती। शर्मा ने कहा लखनऊ में तो होड़ लगती थी कि अटलजी का खास कौन है लेकिन उनकी स्मरणशक्ति ऐसी थी कि छोटे से छोटे कार्यकर्ता को भी नाम से बुला लेते थे।
उन्होंने कहा हरकिशन सिंह सुरजीत कम्युनिस्ट पार्टी के नेता थे। जब वे एक बार लखनऊ पहुंचे तो अटलजी ने उन्हें गले लगाते हुए कहा कैसे हो सुरजीत। यह देखकर सभी कार्यकर्ताओं को बहुत आश्चर्य हुआ। यही कारण था कि अटलजी को विपक्षी भी बहुत मानते थे। डॉ. शर्मा ने कहा कि आज जब उनका स्वास्थ्य खराब है तो अंतर्मन में वेदना है।