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उपराष्ट्रपति चुनाव: मायावती ने एनडीए उम्मीदवार का किया समर्थन, ब्रजेश पाठक बोले- बहन जी का आभार

Wed, 03 Aug 2022 10:51 PM IST
ishwar ashish एएनआई, लखनऊ

सार

बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को ट्वीट कर उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को समर्थन देने का एलान किया है। इसके लिए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उनका आभार जताया है।
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उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उपराष्ट्रपति के चुनाव में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ का समर्थन करने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती का आभार जताया है।

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उन्होंने कहा कि बहन जी ने हमेशा से वंचित वर्ग की आवाज उठाई है और मुझे लगता है कि जिस तरह से उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू जी को सपोर्ट किया और उपराष्ट्रपति के चुनाव में जगदीप धनखड़ जी को सपोर्ट किया है इसके लिए मैं उनका आभार प्रकट करता हूं।


 

भाजपा को फिर मिला मायावती का साथ
भाजपा को फिर से मायावती का साथ मिला है। हाल ही  में हुए राष्ट्रपति चुनाव में भी मायावती ने एनडीए प्रत्याशी को समर्थन दिया था। अब उपराष्ट्रपति चुनाव में भी उन्होंने एनडीए उम्मीदवार को ही समर्थन देने की घोषणा की है। राष्ट्रपति चुनाव में मायावती ने जब एनडीए उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मु को समर्थन देने की घोषणा की तो कहा कि उनका किसी पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर वह केवल इसलिए मुर्मु को समर्थन दे रहीं हैं क्योंकि वह आदिवासी वर्ग की महिला हैं। अब उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी उन्होंने एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को समर्थन देकर सभी को चौंका दिया। हालांकि उन्होंने इसे भी अपने मूवमेंट को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय बताया।
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सपा साधेगी निशाना
मायावती के इस निर्णय पर सपा ने निशाना साधने की तैयारी शुरू कर दी है। खास तौर से मुस्लिमों को यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि मायावती पूरी तरह से भाजपा के साथ हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव में उनकेउम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा से यह बात बिल्कुल साफ हो गई है। दरअसल आजमगढ़ में हुए लोकसभा उपचुनाव में बसपा प्रत्याशी गुड्डू जमाली को भी मुस्लिमों का काफी वोट मिला। इसी का परिणाम रहा कि वहां सपा चुनाव हार गई। उधर गुड्डू को काफी वोट मिलने से बसपा को आस जगी कि लोकसभा चुनाव में वह अधिक से अधिक मुस्लिमाें को जोड़ने का प्रयास करेगी। इसमें सफलता मिल सकती है लेकिन इस निर्णय के बाद सपा, कांग्रेस आदि बसपा की घेराबंदी से चूकने वाले नहीं हैं। खास तौर से मुस्लिमों तक अपनी बात जरूर पहुंचाई जाएगी।

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