गुजरात की ढाबेली से लेकर असम के पपीता खार तक। मराठी शंकरपाली से लेकर अमृतसरी कुलचे तक। केरल के पुश्तैनी व्हाइट कद्दू से लेकर शकरकंद से बनी बंगाली रांग आलूर पीठा और भगवान जगन्नाथ के पसंदीदा उड़िया पोड़ो पीठा केक तक। जब विविध संस्कृतियों के ये स्वादिष्ट पकवान अवध की थाल में सजे तो उनकी खुशबू से सिर्फ वातावरण ही नहीं, तबीयत भी महक उठी। स्वादिष्ट पकवानों ने लोगों को आकर्षित किया और उन्हें रेसिपीज नोट करने पर भी मजबूर कर दिया।
बात हो रही है संस्कृति विभाग और अमर उजाला के संयुक्त आयोजन संगमम् की। संगीत नाटक अकादमी में शनिवार से शुरू हुए दो दिवसीय आयोजन में अवध के व्यंजनों से लेकर देश के सभी प्रदेशों की संस्कृतियों की झलक देखने को मिली। संगमम् में पंजाबी, सिंधी, राजस्थानी, तमिल, मलयाली, असम, बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र के स्वादिष्ट पकवानों सहित जैनियों के बगैर लहसुन-प्याज के बनने वाले लजीज व्यंजन मौजूद रहे। पेश है संगमम् के मंच पर विविध संस्कृतियों के पकवानों व उनकी खासियतों पर आधारित रिपोर्ट :
उड़ीसा : भगवान जगन्नाथ के लिए मां लक्ष्मी बनाती हैं ‘पोड़ो पीठा’
उड़ीसा के स्टॉल पर डॉ. तूफान राउत, पद्मावती पांडा, कपिलचंद्र पांडा ने लजीज व्यंजनों को लगाया। डॉ. तूफान ने बताया कि पोड़ो पीठा एक केक होता है, जिसे चावल, काजू, नारियल, इलाइची से बनाया जाता है। यह केक भगवान जगन्नाथ के लिए मां लक्ष्मी बनाती हैं और जब प्रभु सोने जाते हैं तो उन्हें यह केक खिलाया जाता है। स्टॉल पर घी से तैयार आसिया भी था। जिसे चावल पाउडर व खजूर के गुड़ से बनाया जाता है।
राजस्थान : दाल, बाटी, चूरमा खाते हैं सूरमा
विनोद माहेश्वरी, रितु माहेश्वरी व अंजू अग्रवाल ने राजस्थानी स्टॉल पर राजपूतों के पसंदीदा पकवानों को सजाया था। इसमें दाल, बाटी, चूरमा के अलावा सेव की सब्जी सांगरी, टिक्कड़, गट्टे की सब्जी, छाछ प्रमुख रूप से शामिल रहा। विनोद माहेश्वरी ने बताया कि राजस्थानी थाल में यह सब आइटम शामिल रहते हैं। इन्हें बनाने के दौरान विशेष एहतियात बरती जाती है।
पंजाब : मक्के की रोटी संग सरसों दा साग
सनी तलवार लखनऊ में राधिका तलवार के साथ क्लाउड किचन चलाते हैं। वह पंजाबी पकवानों को तैयार कर डिलीवरी करते हैं। उन्होंने बताया कि पंजाबी पकवानों में मक्के की रोटी केसाथ सरसों के साग का जो कॉम्बिनेशन है, वह सर्दियों को यादगार बना देता है। पंजाब में कई किस्म के कुलचे बनाए जाते हैं, जिसमें अमृतसरी कुल्चे खाने व पचाने में अच्छे माने जाते हैं।
जैन संस्कृति : सेहत के साथ संस्कृति
जैनियों का खानपान बेहद सधा हुआ रहता है। संगमम के मंच पर जैन संस्कृति के खानपान का स्टॉल भी लगा हुआ है, जहां लहसुन व प्याज के बगैर बनाए जाने वाले व्यंजनों की भरमार है। ऐसे व्यंजन भी हैं, जो सूर्यास्त के पहले व बाद में खाए जाते हैं। केले मटर की सब्जी व चावल के आटे तथा दाल केफरे दर्शकों ने बेहद पसंद किए।
केरल : मलयाली कद्दू संग अदरक की चटनी
संगमम् में केरल व तमिलनाडु केस्टॉलों पर पारम्परिक पकवानों ने दर्शकों को आकर्षित किया। मलयाली व्हाइट कद्दू से बना रायता विशेष रूप से पसंद किया गया। साथ ही इसी कद्दू से बनी खीर, ब्राउन राइस व केले की सब्जी लगाई गई थी। जिसे केले के पत्ते पर खिलाया जाता है। इसके साथ अदरक की चटनी मिलती है। वहीं तमिल स्टॉल पर मसाला डोसा, उत्तपम, इडली व उड़द की दाल लगाई गई थी।
असम : केले के पत्ते की राख से बनता है ‘खार’
पपीते का खार असमिया संस्कृति का पारम्परिक व्यंजन है। असम केस्टॉल पर अनुपम सोनवाल ने इस खार से बनी पपीते की सब्जी लगाई थी। अनुपम ने बताया कि खार बनाने के लिए केले के सूखे पत्ते को जलाया जाता है। उसकी राख को रातभर पानी में रखा जाता है, फिर सुबह छाना जाता है और पपीते की सब्जी में उसे मिलाया जाता है। यह पाचन केलिए रामबाण होता है। खार बनाने का तरीका सदियों पुराना है। स्टॉल पर चिवड़ा, गुड़, दही का संगम भी था, जो नाश्ते में खाया जाता है। बेडे़लोइटा की चटनी भी खास रही।
महाराष्ट्र : चकली से शंकरपाली के साथ वड़ा पाव, चकली
मराठियों को वड़ा पाव बेहद पसंद होता है। यह बात सब जानते हैं। पर संगमम् के मंच पर पहुंचे मराठियों ने वड़ा पाव के अतिरिक्त कई ऐसे पकवान लगाए, जो न केवल स्वाद में आला थे, बल्कि सेहत के लिए भी किसी खजाने से कम नहीं थे। शंकरपाली स्वाद में मीठा होता है। सूजी के लड्डू, उपिठ, भाकखाड़ी को स्वाद के शौकीनों ने पसंद किया। स्टॉल पर पकवान उमेश पाटिल, गजानन पाटिल, सागर, सचिन, प्रिया पाटिल ने तैयार किए थे।
बंगाल : खजूर के गुड़ की खुशबू में लिपटी शकरकंद
पश्चिम बंगाल केखानपान से पूरी दुनिया परिचित है। संगमम में पश्चिम बंगाल के स्टॉल पर रांग आलूर पीठा दिखाई दिया, जोकि पारम्परिक व्यंजन है। इसे बनाने के लिए उबली हुई शकरकंद ली जाती है, जिसे मसल लिया जाता है और उसमें खजूर के गुड़ व नारियल को मिलाया जाता है। स्टॉल पर बैंगन, गोभी, आलू, साग व परवल भी था, जिसे पांचभाजा कहा जाता है।
यूपी : अवध की थाल में मिले लुप्त व्यंजन
अवध की थाली में ऐसे व्यंजन भी मिले, जो लुप्त से हो चुके हैं। शेफ रितु जायसवाल ने बताया कि सकौड़ा लुप्तप्राय रेसिपी है। इसके अतिरिक्त कमलगट्टे की सब्जी, ओट्स से बने खस्ते, सगपैता, कैथे की चटनी, नर्गिसी कोफ्ते, ग्रेवीयुक्त पकौड़ी अवध की थाल में सजे हुए मिले। रितु ने गोभी के गुलाब जामुन भी बनाए थे, जो दर्शकों को लुभा रहे थे। इसके अतिरिक्त काली गाजर का हलवा व पालक हलवा भी खास था। लखनवी मलाई मक्खन व केसरिया दूध का स्टॉल सत्यपाल सिंह की ओर से लगाया गया था।
गुजरात : ढाबेली के स्वाद ने लुभाया
संगमम में सिंधी व गुजराती का स्टॉल था, जिसमें ढोकला, फाफड़ा के अलावा ढाबेली थी। ढाबेली कई तरह से बनाई जाती है। इसके अलावा गुजराती व सिंधी की मिश्रित भाई-भाई थाली भी थी। सिंधियों के पारम्परिक पकवान लखनऊवासियों को खासे पसंद आते हैं। जब लखनऊ महोत्सव हुआ करता था, उस दौर में गुजराती ढाबेली का जो क्रेज था, वह देखने को मिला।
बिहार : मालपुआ देख मुंह में आ जाए पानी
भोजपुरी में जितनी मिठास होती है, उससे कहीं अधिक मिठास उनकेपकवानों में रहती है। बिमला सिंह व आशा राय ने स्टॉल लगाया, जहां पूर्वांचल का स्वाद दर्शकों को मिला। छठ पूजा में बनने वाली खजूर की डिश खास रही। ऐसे ही बाटी चोखा व आटे का हलवा और दाल पूड़ी भी पसंद की गई।
मिलेट अनाज के फायदे बताए
अमर उजाला संगमम् कार्यक्रम में पोषक तत्वों को खाने में शामिल करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की तरफ से मिलेट अनाज का स्टॉल लगाया गया। सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि मिलेट अनाज अथवा मोटे अनाज को खानपान की आदत में लाने के अलावा इससे बने खाद्य पदार्थ की बिक्री के लिए यहां रखे गए हैॅं। रविवार को भी यह स्टॉल रहेगा जहां से मिलेट की खूबियों के लिए जानकारी और उत्पाद की खरीद की जा सकती है। स्टॉल पर पहुंचे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, राज्यमंत्री असीम अरूण ने भी मिलेट अनाजों के फायदों की जानकारी ली। यह भी महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की गई है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सांसदों से इसके लिए जागरूकता फैलाने की अपील संसद में की थी।