लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त इस्लामी विद्वान, शिक्षाविद और लेखक सलमान हुसैनी नदवी का सोमवार रात दुबग्गा स्थित आवास पर इंतकाल हो गया। वह 72 वर्ष के थे और लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित थे। उनके निधन से धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर है।
वह दारुल उलूम नदवतुल उलमा के वरिष्ठ आलिम थे। उन्होंने अपने पीछे पांच बेटे, तीन बेटियों और पत्नी समेत भरा पूरा परिवार छोड़ा है। हजारों लोगों ने उनके जनाजे को कंधा दिया। उन्हें शाम पांच बजे मलिहाबाद के कटौली स्थित कब्रिस्तान में दफन किया गया। वह इस्लामी शिक्षा, सीरत-ए-नबवी और उम्मत की एकता पर अपने गहन विचारों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने दशकों तक दारुल उलूम नदवतुल उलमा में अध्यापन किया। उनकी अरबी, उर्दू और हिंदी में अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुईं। वह अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य भी रहे।
बौद्धिक और धार्मिक क्षति
मजलिस-ए-उलमा-ए-हिंद के महासचिव कल्बे जवाद ने उनके निधन को उम्मत-ए-इस्लाम की अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि सलमान हुसैनी नदवी ने कुरआन और पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं का संदेश पहुंचाया। उन्होंने जीवनभर इस्लाम विरोधी प्रचार का जवाब दिया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर तकफीरी और नासिबी विचारधारा का विरोध किया। उनके स्पष्ट विचार हमेशा याद किए जाएंगे।
मौलाना सलमान हुसैनी नदवी
मौलाना सलमान हुसैनी नदवी
मौलाना सलमान हुसैनी नदवी