मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर सरकारी एजेंसियां कतई सतर्क नहीं हैं।
मुख्यमंत्री जल्द से जल्द लखनऊ को मेट्रो की सौगात देना चाहते हैं लेकिन सरकारी विभागों के अधिकारी ही उनकी योजना में पलीता लगा रहे हैं।
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की दी गई डेडलाइन बीतने के बावजूद अधिकांश एजेंसियों ने लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) को यूटीलिटी मैप नहीं उपलब्ध करवाया है।
20 मई की डेडलाइन तक केवल जल संस्थान ने अपना मानचित्र उपलब्ध करा दिया है, जोकि, सबसे अहम था।
मेट्रो रूट पर ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग तक मुख्य तौर पर सबसे पहले वाटर लाइन ही ट्रांसफर की जानी है।
जल संस्थान ने अमौसी से आलमबाग तक नई वाटर लाइन और इससे पहले पुरानी वाटर लाइन का मानचित्र एलएमआरसी को उपलब्ध करवा दिया गया है।
सबसे राहत की बात यह है कि इस रूट पर सीवर लाइन नहीं है, इसलिए इसमें बदलाव की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।
दिन पर दिन मेट्रो प्रोजेक्ट लेट
मेट्रो के काम में कोई अड़ंगा न आए इसलिए मुख्यमंत्री ने चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले ही मेट्रो प्रोजेक्ट का शिलान्यास कर दिया था।
शिलान्यास के समय मुख्यमंत्री का दावा था कि 2016 तक किसी भी हालत में शहर में मेट्रो दौड़ा दी जाएगी।
लेकिन इस प्रोजेक्ट में सरकारी विभाग जिस तरह की सुस्ती दिखा रहे हैं उससे तो कहीं भी यह नहीं लग रहा है कि मेट्रो परियोजना समय पर पूरी हो पाएगी।
लेसा और मार्ग प्रकाश की स्थिति का आंकलन नहीं
अब एलएमआरसी को लेसा के तारों और पोलों की स्थिति की जानकारी चाहिए। पीडब्लयूडी और नगर निगम की मार्ग प्रकाश व्यवस्था के पोलों की संख्या का आंकलन भी एलएमआरसी को करना है, मगर इसकी भी कोई जानकारी अब तक नहीं उपलब्ध करवाई गई है।
इस वजह से यूटीलिटी ट्रांसफर में आने वाले समय में कुछ विलंब हो सकता है।
एलएमआरसी की ओर से कहा जा रहा है कि, एक बार बची हुई एजेंसियों को फिर रिमाइंडर दिया जाएगा कि, वे जल्द से जल्द अपने मैप प्रस्तुत करे।