आने वाले वर्षों में बिजली की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए निजी डवलपर्स से 6000 मेगावाट बिजली खरीदने का मामला फिलहाल टल गया है।
यह बिजली केस-1 (खुद जमीन, कोयला व पानी की व्यवस्था करने वाले डवलपर्स) के तहत मंजूर की गई परियोजनाओं से खरीदी जानी है।
केस-1 के तहत खरीदी जाने वाली बिजली की दरों को लेकर विवाद खड़ा हो जाने की वजह से शुक्रवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एनर्जी टास्क फोर्स (ईटीएफ) ने डवलपर्स के प्रस्तावों (बिड) को हरी झंडी नहीं दी।
अब नए सिरे से प्रस्तावों का परीक्षण करके ईटीएफ के समक्ष प्रस्ताव रखा जाएगा। उधर मध्य प्रदेश की चितरंगी परियोजना से 2456 मेगावाट बिजली के लिए रिलायंस एनर्जी को छह माह का वक्त और दिया गया है।
केस-1 के तहत 6000 मेगावाट बिजली खरीद का दीर्घकालीन करार करने के लिए पिछले दिनों बिड हुई थी। करार का लक्ष्य पूरा करने के लिए एल-5 और एल-6 तक की दरों को अनुमोदित करने का प्रस्ताव ईटीएफ को भेजा गया था।
ये दरें 5.50 से लेकर 6 रुपये प्रति यूनिट तक हैं। बिड में आई ज्यादा दरों को लेकर विवाद पैदा हो जाने के बाद ईटीएफ ने इसे टाल दिया।
अलबत्ता रिलायंस को चितरंगी परियोजना से बिजली मुहैया कराने के लिए छह माह की मोहलत और दे दी गई है। अप्रैल में भी रिलायंस का समय बढ़ाया गया था।
सूत्रों का कहना है कि कोल लिंकेज न मिलने से रिलायंस चितरंगी के बजाय दूसरी परियोजनाओं से यूपी को बिजली देना चाहता है।
रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) की शर्तों के अनुसार यह गलत है। करार के मुताबिक चितरंगी परियोजना से ही बिजली देने लिए रिलायंस को छह माह की मोहलत और दे दी गई है।