फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इन माननीयों की मात ही बन गई सौगात

Thu, 13 Mar 2014 03:25 PM IST
इन्दुभूषण पांडेय/ अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव के पहले प्रदेश में हुआ विधानसभा का चुनाव सेमीफाइनल माना जा रहा था। इसी लिहाज से सभी दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी।
विज्ञापन


मुख्य अखाड़ा अवध का इलाका था। बसपा का गढ़ अंबेडकरनगर इसी में था तो भाजपा की अयोध्या भी। कांग्रेस की दृष्टि से सुल्तानपुर और अमेठी की सीटें भी अहम थीं।

रालोद के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष का अपना कार्यक्षेत्र फैजाबाद भी इसी इलाके में था।

विधानसभा चुनाव के परिणाम आए तो भाजपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद के बड़े-बड़े दिग्गज इस इलाके में अपने-अपने मैदान में मुंह के बल गिरे मिले।

न सवाल-न जवाब, दे दी गई जिम्मेदारी

जाहिरा तौर पर इन दिग्गजों से पार्टी की पराजय का हिसाब-किताब लिया जाना चाहिए था, लेकिन हुआ इसके ठीक उलट।

जिन दिग्गजों के इलाके में उनके दल की ज्यादा फजीहत हुई उन्हें भारी तमगों से नवाज दिया गया।

विधानसभा चुनाव के बाद इसी इलाके के बसपा, कांग्रेस, रालोद के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष बना दिए गए।

और तो और भाजपा की अयोध्या में भद्द पिटी तो कभी वहां के सांसद रहे राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेता विनय कटियार को भी राज्यसभा भेजकर उपकृत किया गया।

बसपा- अंबेडकरनगर और राम अचल राजभर

अंबेडकरनगर जिला न सिर्फ बसपा का गढ़ बल्कि बसपा सुप्रीमो मायावती का खुद का कार्य क्षेत्र रहा है। यहां सांसद भी बसपा का है।

बीते विधानसभा के चुनाव में बसपा की यहां जैसी दुर्गति हुई वह चौंकाने वाली थी। पहली बार बसपा यहां सभी सीटें हार गई।

लेकिन हुआ क्या, बसपा में यहां के हमेशा से कद्दावर माने जाने वाले रामअचल राजभर जो प्रदेश सरकार के प्रभावशाली काबीना मंत्री थे, उनका बेटा चुनाव हार गया था।

लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद रामअचल राजभर को बसपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया।

यही नहीं बसपा ने अपने दस सिटिंग एमपी के टिकट काटे तो भी अंबेडकरनगर इससे अछूता है। यहां के सांसद राकेश पांडेय को दोबारा मैदान में उतारा गया है।

कांग्रेस- फैजाबाद और निर्मल खत्री

राममंदिर आंदोलन और अयोध्या के चलते फैजाबाद ढाई दशक से विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए अहम रहा है।

निर्मल खत्री यहां से सांसद हैं। विस चुनाव में जिले की सभी सीटों पर कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई थी। सहयोगी रालोद के मुन्ना सिंह चौहान बीकापुर से पराजित हुए थे।

कांग्रेस ने निर्मल खत्री को प्रदेश का अध्यक्ष बनाया तो रालोद भी पीछे नहीं रही उसने मुन्ना सिंह चौहान को प्रदेश अध्यक्ष का ताज दे दिया।

सुल्तानपुर- संजय सिंह और अमिता सिंह

यह जिला नेहरू परिवार का कर्मक्षेत्र माना जाता है। यहां के कांग्रेस सांसद संजय ने बीते विधानसभा चुनाव में पत्नी अमिता सिंह को भी चुनाव लड़ाया था वह तो हारीं ही पूरे जिले में कांग्रेस का खाता नहीं खुला।

फिर भी संजय को राज्यसभा सदस्य तो बनाया ही गया अमिता को लोकसभा का टिकट दे दिया गया। अमिता यहां से कांग्रेस विधायक तो रह ही चुकी हैं राजनाथ सिंह के भाजपा शासनकाल में वह उनके मंत्रिमंडल में भी थीं।

भाजपा-अयोध्या और विनय कटियार

बीते विधानसभा चुनाव में बाबूसिंह कुशवाहा का भाजपा में शामिल होना एक विचित्र राजनीतिक घटनाक्रम था।

कुशवाहा को भाजपा में शामिल कराने में सांसद विनय कटियार की अहम भूमिका किसी से छिपी नहीं है। कुशवाहा को शामिल किए जाने को लेकर भाजपा में ही बवंडर उठा।

ठीकरा कटियार के सिर फोड़ा जाने लगा। कुशवाहा पार्टी से भी निकाले गए। लेकिन विधानसभा चुनाव नतीजा आने के बाद विनय कटियार को पार्टी ने सौगात दी और उन्हें सीधे राज्यसभा भेज दिया गया।
विज्ञापन

अंबिका चौधरी को भी मिला हारने का इनाम

चुनाव हारने वालों को सिर-आंखों पर बिठाने के मामले में सपा भी पीछे नहीं है।

विधानसभा चुनाव में सपा की लहर के बावजूद अंबिका चौधरी को बलिया की फेफना सीट पर भाजपा के उपेंद्र तिवारी ने पटकनी दे दी।

सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का विश्वासपात्र होने की वजह से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने न सिर्फ अंबिका को मंत्रिमंडल में राजस्व जैसे अहम विभाग की कमान सौंपी, मंत्रिमंडल में शामिल करने के बाद सपा ने उन्हें विधान परिषद में भी भेजा।

विधानमंडल के उत्तरशती रजत जयंती समारोह की जिम्मेदारी भी अंबिका को ही सौंपी गई लेकिन बाद में उनके कार्यकलापों से नाराज अखिलेश ने उनके पर कतरते हुए राजस्व विभाग वापस ले लिया।

अब अंबिका के पास पिछड़ा वर्ग और विकलांग कल्याण जैसा महत्वहीन विभाग है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें